आतंकवाद का हितैषी न बने बांग्लादेश, पाक की पैरवी कर रहे पड़ोसी देश को जयशंकर का सख्त संदेश

शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश की पाकिस्तान के साथ करीबी जगजाहिर है। अब मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के पुनरुद्धार पर जोर दे रही है, जिसे भारत-पाकिस्तान संघर्ष के कारण लंबे समय से निलंबित कर दिया गया है। बांग्लादेश की मांग पर भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि उसे आतंकवाद का हितैषी नहीं बनना चाहिए। बता दें कि हाल ही में भारत और बांग्लादेश के बीच बहुपक्षीय सम्मेलन के दौरान सार्क को पुनर्जीवित करने को लेकर चर्चा हुई। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान सार्क की स्थायी समिति की बैठक बुलाने और संगठन को पुनर्जीवित करने के लिए भारत का समर्थन मांगा था। भारत ने सार्क को पुन: प्रासंगिक बनाने के बांग्लादेश के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और उसे दो टूक शब्दों में समझा दिया है कि उसे आतंकवाद का सामान्यीकरण नहीं करना चाहिए।
अब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने बताया कि इस बैठक में बांग्लादेश की ओर से सार्क का मुद्दा उठाया गया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पूरा दक्षिण एशिया जानता है कि सार्क को बाधित करने के लिए कौन सा देश और कौन सी गतिविधियां जिम्मेदार हैं। विदेश मंत्री (जयशंकर) ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश को आतंकवाद को नॉर्मल नहीं बनाना चाहिए। भारत के विदेश मंत्री ने बांग्लादेश को स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद को सामान्य करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। भारत का कहना है कि क्षेत्रीय सहयोग और शांति के लिए यह जरूरी है कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाए।
भारत-चीन संबंधों में अच्छी-खासी प्रगति
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जोहान्सबर्ग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ मुलाकात की। इस दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति का प्रबंधन, कैलाश मानसरोवर यात्रा, उड़ान कनेक्टिविटी और यात्रा सुविधाओं के बारे में चर्चा हुई। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश सचिव स्तर पर हुई वार्ता से द्विपक्षीय संबंधों में ‘उल्लेखनीय प्रगति’ हुई है। विदेश मंत्री ने जोहान्सबर्ग में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में वांग यी की मौजूदगी में कहा कि मौजूदा बैठक और अन्य बैठकों ने हमारे संबंधों के कठिन दौर में भी हमें बातचीत का अवसर प्रदान किया है।








