डिजिटल अरेस्ट घोटाले में छह गिरफ्तार, अब तक 92 करोड़ की धोखाधड़ी का पर्दाफाश

पुलिस महानिदेशक पंजाब और डीआईजी रूपनगर रेंज के मार्गदर्शन में साइबर आधारित वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण सफलता में एसएसपी हरमनदीप हंस की देखरेख में और डीएसपी रुपिंदरदीप कौर सोही के नेतृत्व में साहिबजादा अजीत सिंह नगर की साइबर अपराध पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट घोटाले में शामिल दो गिरोहों के 10 सदस्यों की पहचान की है और 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया हैए जबकि शेष आरोपियों को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं। एसएसपी हरमनदीप सिंह हंस ने बताया कि डिजिटल गिरफ्तारी घोटाला एक सुनियोजित साइबर अपराध मॉडल है, जिसमें आरोपी टेलीफोन पर खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य कानूनी एजेंसियों का वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं। वे पीडि़तों को झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने का डर दिखाकर और तथाकथित डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देकर उनसे मोटी रकम ठग लेते हैं। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि इन दोनों गिरोहों ने देशभर के कई राज्यों में दर्जनों लोगों से धोखाधड़ी की है और राष्ट्रीय स्तर पर करीब 92 करोड़ रुपए की राशि का गबन किया है। गिरफ्तार किए गए 6 आरोपी तमिलनाडु, कर्नाटक और गुजरात के निवासी हैं।
इनमें से दो आरोपी पहले से ही जेल में हैं, जिन्हें प्रोडक्शन वारंट के जरिए लाया जाएगा। वहीं, मुकदमे की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई डिजिटल गिरफ्तारी के संबंध में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन फेज-7 में दर्ज दो अलग अलग मामलों में की गई है। इसके तहत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे एसएसएस नगर के पीडि़तों के साथ की गई लगभग 3 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का पता लगा लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस गिरोह द्वारा पूरे भारत में लगभग 92 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया गया है, जो एक और कदम है। 310 बैंक खाते फ्रीज बंद कर दिए गए हैं। इसके अलावा, जांच के दौरान यह भी पता चला है कि आरोपी के खिलाफ बेंगलुरु में 12.50 करोड़ रुपए की डिजिटल गिरफ्तारी के संबंध में केस संख्या 995, 2024 यूएस 318, 4, 319 2 बीएनएस और 66 सी 66डी, आईटी एक्ट पीएस नॉर्थईस्ट डिवीजन दर्ज है








