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आवास निर्माण एवं शहरी विकास विभाग: वर्ष 2025 का लेखा-जोखा

डीगढ़, 25 दिसंबर:

पंजाब के आवास निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री सरदार हरदीप सिंह मुंडियां ने आज कहा कि जिन प्लॉट धारकों ने अपनी बकाया किश्तें जमा नहीं करवाईं, निर्धारित समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा नहीं कर सके या नॉन-कंस्ट्रक्शन फीस जमा नहीं कर पाए, उनके लिए विभाग द्वारा वर्ष 2025 के दौरान एमनेस्टी स्कीम लाई गई है। इस योजना का उद्देश्य नियोजित शहरी विकास को बनाए रखते हुए पुराने मामलों का समाधान करना और लोगों का विश्वास मजबूत करना है।

एक महत्वपूर्ण नागरिक-केंद्रित संशोधन की जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले लोगों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब अपार्टमेंट और प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट में संशोधन किया गया है, जिससे वे बिना एन.ओ.सी. प्राप्त किए अपने प्लॉट का पंजीकरण करवा सकते हैं। इसके साथ ही अनधिकृत विकास पर रोक लगाने के लिए अनधिकृत कॉलोनियां विकसित करने वाले प्रमोटरों के लिए सजा और जुर्माने में वृद्धि करते हुए कड़े संशोधन किए गए हैं।

निवेश-अनुकूल नीतियों को बढ़ावा देने और डेवलपर्स पर दबाव कम करने के लिए विभाग ने लाइसेंसों और औद्योगिक पार्क परियोजनाओं के आंशिक समर्पण की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि लाइसेंस/औद्योगिक पार्क परियोजनाओं को आंशिक रूप से निलंबित या आंशिक रूप से रद्द करने के प्रावधान किए गए हैं, साथ ही राज्य में नए औद्योगिक पार्कों की स्थापना के लिए नए रास्ते खोले गए हैं।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए मेगा परियोजनाओं और पापरा लाइसेंसशुदा परियोजनाओं को पूरा करने के लिए समय-सीमा 31.12.2025 तक बढ़ाई गई है। प्रमोटरों को और राहत देते हुए ऐसी परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए 31.12.2025 के बाद अधिकतम पांच वर्षों की एकमुश्त विस्तार अवधि भी प्रदान की गई है।

सरदार हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा कि भवन नियम 2025 को मंजूरी दे दी गई है और इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। इन नियमों का मसौदा आम जनता और स्टेकहोल्डर्स के सुझावों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जो उद्योग और रियल एस्टेट क्षेत्र को बढ़ावा देगा।

उन्होंने बताया कि कॉलोनियों के विकास हेतु लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए 60 दिनों की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार की गई है, ताकि देरी कम हो और डेवलपर्स को सुविधा मिल सके।

आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित भूमि के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु विभाग ने ईडब्ल्यूएस भूमि पॉकेट्स (निर्धारित भूमि) के मोनेटाइजेशन की नीति अधिसूचित की है। इससे प्राप्त राजस्व का उपयोग विशेष रूप से ईडब्ल्यूएस आवासों के निर्माण और कल्याण के लिए किया जाएगा।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि औद्योगिक विकास की दिशा में एक अहम कदम के तहत अमृतसर–कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर के अंतर्गत राजपुरा में एकीकृत मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से पर्यावरणीय मंजूरी मिल गई है, जो पंजाब के औद्योगिक विकास के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब इलेक्ट्रिक वाहन नीति–2022 के अनुसार पंजाब शहरी योजना एवं विकास भवन नियमों में संशोधन किए गए हैं, जिससे सभी श्रेणियों की इमारतों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना और स्टेशनों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि कर्मचारियों की आवासीय आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से रेंटल हाउसिंग नीति में संशोधन करते हुए एस.ए.एस. नगर और न्यू चंडीगढ़ के औद्योगिक एवं मिक्स्ड-यूज ज़ोनों में स्थित कम से कम 2.5 एकड़ क्षेत्रफल वाले स्टैंडअलोन प्रोजेक्ट्स में किराये की आवास सुविधा की अनुमति दी गई है।

उन्होंने कहा कि त्वरित और कुशल स्वीकृतियां सुनिश्चित करने के लिए चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) प्रमाणपत्र, कंप्लीशन सर्टिफिकेट तथा लेआउट और भवन योजनाओं की स्वीकृति से संबंधित नियामक शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया गया है। इससे मोहाली, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, पटियाला और बठिंडा की शहरी विकास प्राधिकरण अपने स्तर पर स्वीकृतियां देने में सक्षम हो गए हैं।

उन्होंने बताया कि औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से नगर निगम सीमा से बाहर स्थित स्टैंडअलोन उद्योगों के भवन नक्शों की स्वीकृति और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी करने की शक्तियां निदेशक, फैक्ट्री को सौंपी गई हैं। इसके अलावा, नगर निगम सीमाओं, शहरी एस्टेट्स और औद्योगिक फोकल प्वाइंट्स से बाहर स्थित स्टैंडअलोन इमारतों को उचित दरों पर नियमित करने की नीति भी जारी की गई है।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि पारदर्शिता और स्वीकृतियों में आसानी लाने के लिए स्टैंडअलोन उद्योगों हेतु ऑनलाइन भवन योजना स्वीकृति प्रणाली लागू की गई है। इसके अतिरिक्त, नगर निगम सीमाओं के भीतर और बाहर स्थित अवैध कॉलोनियों में प्लॉटों की एन.ओ.सी. आवेदनों की प्रक्रिया के लिए एक एकीकृत सिंगल विंडो पोर्टल शुरू किया गया है।

उन्होंने बताया कि जल संसाधनों के संरक्षण के उद्देश्य से 15 एमजीडी क्षमता सहित 5 एमजीडी अल्ट्रा फिल्ट्रेशन क्षमता वाला सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पंजाब के लोगों को समर्पित किया गया है। 145.26 करोड़ रुपये की लागत से, 11 वर्षों के संचालन एवं रख-रखाव सहित स्थापित यह राज्य का सबसे बड़ा अल्ट्रा फिल्ट्रेशन टर्शरी ट्रीटमेंट प्लांट है, जो बागवानी, सड़कों की धुलाई, निर्माण और औद्योगिक उपयोग हेतु उपचारित पानी की पुनः आपूर्ति करेगा।

प्रमोटरों और डेवलपर्स की समस्याओं के त्वरित समाधान तथा समयबद्ध, पारदर्शी और निर्बाध सेवाएं सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा एक समर्पित ईमेल आईडी transparency.hud@gmail.com उपलब्ध करवाई गई है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष विभाग के अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत आवंटियों, प्रमोटरों और डेवलपर्स के लंबित मामलों के निपटारे के लिए मेगा कैंप भी लगाए गए।

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