पंजाबराजनीति

5,640 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से नहरों का आधुनिकीकरण

चंडीगढ़, 30 दिसंबर:

पंजाब के जल संसाधन मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज बताया कि वर्ष 2025 राज्य में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जल प्रबंधन के लिहाज़ से एक निर्णायक वर्ष रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किसान-हितैषी दृष्टिकोण अपनाया है, जिसके तहत राज्य के दूर-दराज़ क्षेत्रों तक नहरी पानी पहुंचाने के साथ-साथ भूजल स्तर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। रिकॉर्ड वित्तीय खर्च और लंबे समय से उपेक्षित बुनियादी ढांचे के उन्नयन के साथ-साथ जल संसाधन विभाग ने राज्य के सभी क्षेत्रों, विशेष रूप से सूखा-प्रभावित और जलभराव (सेम) से ग्रस्त क्षेत्रों में पानी की समान उपलब्धता सुनिश्चित की है।

अधिक जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 5,640 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य पूरे किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 878 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं पूरी की गईं, जबकि 2023-24 में 1,251 करोड़ रुपये के कार्य, 2024-25 में 1,786 करोड़ रुपये के कार्य किए गए और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए विकास कार्यों हेतु 1,725 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इन कार्यों में नहरों और खालों की लाइनिंग तथा मरम्मत शामिल है, जिससे राज्य के दूर-दराज़ किसानों तक नहरी पानी पहुंचाया जा सका। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में लगभग 2,600 किलोमीटर नहरों की लाइनिंग की गई है, जिसमें अकेले वित्तीय वर्ष 2024-25 में 960 किलोमीटर से अधिक की लाइनिंग शामिल है। इस वर्ष सिंचाई के लिए दूर-दराज़ किसानों तक पानी पहुंचाने हेतु ईंटों से पक्का करने और पाइपलाइन वाले खालों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

श्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि सेम की पुरानी समस्या और रिसाव को हल करने के लिए विभाग द्वारा लगभग 774.80 करोड़ रुपये की लागत से सरहिंद फीडर की रीलाइनिंग की गई है। इस परियोजना के तहत लगभग 100 किलोमीटर रीलाइनिंग का कार्य पूरा हो चुका है।

कैबिनेट मंत्री ने विशेष रूप से कहा कि “आजादी के बाद पहली बार सरहिंद नहर और पटियाला फीडर सहित प्रमुख नहरों की क्षमता में वृद्धि की गई है, जिससे जल प्रवाह को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने और मांग वाले क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ी है।”

श्री गोयल ने बताया कि खालों की बहाली के लिए चलाए गए राज्य-स्तरीय अभियान के तहत 20 से 30 वर्षों से बंद पड़े 18,349 खालों (कुल लंबाई 6,900 किलोमीटर से अधिक) को पुनर्जीवित किया गया है। इसके परिणामस्वरूप 1,300 से अधिक स्थानों को पहली बार सिंचाई के लिए नहरी पानी मिला। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 400 से अधिक स्थानों तक पानी पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि 25 वर्ष से पहले खालों की मरम्मत पर रोक लगाने वाली नीति को रद्द कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद मनरेगा और राज्य निधियों के माध्यम से मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए गए। पिछले दो वर्षों में 1,277 से अधिक खालों (900 किलोमीटर से अधिक लंबाई) की मरम्मत या बहाली की गई है।

जल संसाधन मंत्री ने कहा कि राज्य के हर कोने तक नहरी पानी पहुंचाने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 870 करोड़ रुपये की लागत से 3,445 किलोमीटर पाइपलाइनों और ईंट-आधारित खालों को कवर करने के कार्य प्रगति पर हैं।

उन्होंने कहा कि पठानकोट जिले में पहली बार क्षेत्र को नहरी पानी उपलब्ध कराने के लिए तीन नई नहरें बनाई जा रही हैं। भूजल स्तर में सुधार के प्रयासों के तहत चोअ और नालों पर लगभग 900 चेक डैम बनाए गए हैं, 189 नहरी रिचार्ज साइटें पूरी हो चुकी हैं और 60 नई रिचार्ज योजनाएं प्रगति पर हैं। आगे उन्होंने बताया कि 127 नए तालाब खोदे जा रहे हैं और इन्हें नहरों से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही 66 मौजूदा तालाबों को नहरी प्रणालियों से जोड़ा जा रहा है। जल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से 3,200 से अधिक सोक पिट्स का निर्माण भी किया जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button