
मलेरकोटल, 07 जनवरी –
पारंपरिक गेहूं–धान की खेती से आगे बढ़कर फसली विविधता अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। इसकी जीवंत मिसाल गांव संदौर के प्रगतिशील किसान तीरथ सिंह हैं, जो पिछले करीब 18 वर्षों से बागवानी विभाग से प्रेरणा लेकर लगातार सब्जियों की पौध (नर्सरी) तैयार कर रहे हैं। वह लगभग 4 एकड़ भूमि में प्याज, मिर्च, शिमला मिर्च और फूलगोभी की पौध तैयार कर अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस प्रगतिशील किसान को पंजाब सरकार द्वारा मुख्यमंत्री पुरस्कार, जिला प्रशासन द्वारा गणतंत्र दिवस के अवसर पर सम्मान चिन्ह तथा पूसा अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।
तीरथ सिंह ने बताया कि जहां पारंपरिक फसलों की उत्पादन लागत लगातार बढ़ती जा रही थी, वहीं मुनाफा कम होता जा रहा था। इसी कारण उन्होंने बागवानी विभाग की सलाह से प्याज एवं अन्य सब्जियों की पौध की नर्सरी शुरू की। वर्तमान में उनकी पौध की मांग न केवल उनके क्षेत्र में बल्कि आसपास के जिलों के किसानों में भी काफी बढ़ गई है और करीब 1500 किसान उनसे सब्जियों की पौध लेकर अच्छी पैदावार प्राप्त कर रहे हैं। कम समय में तैयार होने वाली पौध के माध्यम से उन्हें निरंतर आय प्राप्त हो रही है। उन्होंने बताया कि वह बागवानी विभाग मलेरकोटला से राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत बागवानी मशीनरी, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट तथा सब्सिडी भी प्राप्त कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि फसली विविधता ही भविष्य में खेती को टिकाऊ और लाभदायक बना सकती है। बागवानी फसलें न केवल आय बढ़ाती हैं, बल्कि भूजल संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती हैं। तीरथ सिंह ने अन्य किसानों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर पारंपरिक फसलों के अलावा नए विकल्प अपनाएं।
इस संबंध में उप निदेशक बागवानी डॉ. हरदीप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य में बागवानी क्षेत्र के विस्तार और किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। बागवानी मंत्री मोहितंदर भगत के निर्देशों तथा निदेशक बागवानी पंजाब सैलिंदर कौर के नेतृत्व में बागवानी विभाग किसानों को फसली विविधता अपनाने के लिए पूर्ण सहयोग और विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी उपलब्ध करवा रहा है।
डॉ. हरदीप सिंह ने कहा कि तीरथ सिंह जैसे प्रगतिशील किसान अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि बागवानी विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही अत्याधुनिक तकनीक और योजनाओं की जानकारी लेकर बागवानी फसलों को अपनाएं, ताकि खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सके और किसान आय में वृद्धि






