
चंडीगढ़, 2 फरवरी :
नेशनल डिफेंस कॉलेज, नई दिल्ली के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने देश की एकता और प्रभुसत्ता में पंजाब के बेमिसाल योगदान, वीरता और भाईचारे की भावना, गौरवशाली विरासत तथा भारत की तलवारभुजा और अन्नदाता के रूप में पंजाब की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया।
यहां नेशनल डिफेंस कॉलेज के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा,
“पंजाब ने भारतीय सशस्त्र सेनाओं को जांबाज़ सैन्य अधिकारी और बहादुर जवान दिए हैं, जिन्होंने हमेशा आगे बढ़कर देश के लिए बलिदान दिए हैं।”
उन्होंने कहा, “यह जानकर खुशी हुई कि नेशनल डिफेंस कॉलेज, नई दिल्ली द्वारा 2 से 6 फरवरी तक पंजाब का दौरा किया जा रहा है।”
राज्य में आगमन पर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा,
“यह सामाजिक-राजनीतिक अध्ययन दौरा पंजाब के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अन्य क्षेत्रों को समझने तथा सीखने का एक अनूठा प्रयास है।”
पंजाब की पवित्र और उपजाऊ धरती पर प्रतिनिधिमंडल का हार्दिक स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा,
“राज्य सरकार आपकी मेज़बानी करके गर्व महसूस कर रही है।”
उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि पंजाब महान गुरुओं, पीरों, संतों, पैग़म्बरों और शहीदों की धरती है तथा इसे योद्धाओं और मेहनतकश लोगों की भूमि के रूप में जाना जाता है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा,
“राज्य के युवा सीमाओं की रक्षा करते हैं और हमारे किसान देश का पेट भरते हैं, इसी कारण पंजाब को ‘भारत का अन्नदाता और तलवारभुजा’ कहा जाता है।”
उन्होंने कहा,
“पंजाब के किसान देश के अनाज उत्पादन में सबसे अधिक योगदान देते हैं और राष्ट्रीय पूल में 40 प्रतिशत अनाज पंजाब द्वारा उपलब्ध कराया जाता है।”
उन्होंने आगे कहा,
“पंजाब के बहादुर सैनिकों ने देश की एकता, अखंडता और प्रभुसत्ता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं और यह निर्विवाद सत्य है कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में पंजाबियों ने सबसे अधिक बलिदान दिए।”
मुख्यमंत्री ने कहा,
“पंजाब एक शांतिपूर्ण राज्य है, जहां शांति, प्रेम और भाईचारे की भावना इतनी मजबूत है कि यहां नफरत के बीज नहीं पनप सकते।”
उन्होंने कहा,
“सीमावर्ती राज्य होने के बावजूद पंजाब कभी भी सांप्रदायिक आधार पर विभाजित नहीं हुआ। बल्कि कठिन समय में पंजाबियों ने दुनिया के सामने साम्प्रदायिक सद्भाव की शानदार मिसालें पेश की हैं।”
उन्होंने आगे कहा,
“पवित्र शहर अमृतसर को सार्वभौमिक भाईचारे के प्रतीक के रूप में जाना जाता है और गुरुओं की इस विरासत वाली धरती पर श्री हरिमंदिर साहिब, दुर्गियाना मंदिर, भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल, जलियांवाला बाग और अन्य पवित्र स्थल स्थित हैं।”
उन्होंने कहा,
“पंजाब एक विरोधी देश के साथ 532 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, फिर भी यह धर्मनिरपेक्षता, शांति और सद्भाव का प्रतीक बना हुआ है।”
मुख्यमंत्री ने कहा,
“भारत के सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक पहलुओं के अध्ययन के लिए पंजाब में एक सप्ताह का दौरा शुरू किया गया है।”
उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य राज्यों का दौरा कर उनके सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं को गहराई से समझना है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इससे राज्य स्तर से लेकर गांव स्तर तक प्रशासन, शासन और कानून-व्यवस्था लागू करने की चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलती है।
उन्होंने कहा,
“इस प्रतिनिधिमंडल में कुल 16 अधिकारी हैं, जिनमें से 31 प्रतिशत विदेशी अधिकारी हैं, क्योंकि 16 में से पांच अधिकारी विदेशी देशों से संबंधित हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा,
“प्रतिनिधिमंडल में बांग्लादेश, मिस्र, इंडोनेशिया, मलेशिया और नेपाल से एक-एक अधिकारी शामिल है।”
उन्होंने आगे बताया,
“11 भारतीय अधिकारी हैं, जिनमें सेना के पांच, नौसेना के दो, वायुसेना के दो, एएफएचक्यूसीएस का एक और डीओएलआर का एक अधिकारी शामिल है।”
मुख्यमंत्री ने कहा,
“प्रतिनिधिमंडल में सेना, नौसेना और वायुसेना के ब्रिगेडियर या सचिव स्तर के अधिकारी के साथ-साथ सिविल अधिकारी भी शामिल हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा,
“आईएएस, आईपीएस, आईआरएस, आईएफएस, कोस्ट गार्ड और डीआरडीओ सहित कई सिविल अधिकारी इस महत्वपूर्ण कोर्स का हिस्सा हैं।”
उन्होंने आगे कहा,
“यह कोर्स भारत संबंधी ज्ञान और रणनीतिक दृष्टिकोण, आर्थिक सुरक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, वैश्विक मुद्दे, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिवेश, पड़ोसी देशों के रणनीतिक पहलू तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतियों और ढांचे जैसे क्षेत्रों को कवर करता है।”
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दौरे पर आए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को सम्मानित भी किया और कहा,
“मैं राज्य में उनके सुखद और आरामदायक प्रवास की कामना करता हूं।”









