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भगवंत सिंह मान ने पंजाब को सबसे पसंदीदा निवेश स्थल बनाने के लिए औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति-2026 की शुरुआत की।

लुधियाना, 7 मार्च 2026:

भगवंत सिंह मान ने लुधियाना में आज ऐतिहासिक औद्योगिक और व्यापार विकास नीति-2026 की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि सरकार क्रांतिकारी सुधारों और उद्योगों की जरूरतों के अनुसार तैयार प्रोत्साहन ढांचे के माध्यम से पंजाब को देश का नंबर-1 निवेश गंतव्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास को तेज करने, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और पूरे राज्य में रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से यह नई नीति तैयार की है। उन्होंने बताया कि पंजाब में पहले ही रिकॉर्ड स्तर का निवेश आ रहा है और नई नीति निवेशकों को 20 तक प्रोत्साहन चुनने तथा अपने कारोबारी मॉडल के अनुसार अनुकूलित पैकेज बनाने की सुविधा देती है।

 

उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत पंजाब के इतिहास में पहली बार पूंजी सब्सिडी शुरू की गई है। इसके अलावा स्थायी पूंजी निवेश के 100 प्रतिशत तक प्रोत्साहन देने का प्रावधान है और रोजगार सृजन सब्सिडी की पात्रता को घटाकर 25 करोड़ रुपये निवेश और 50 कर्मचारियों तक कर दिया गया है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति औद्योगिक प्रोत्साहन ढांचे में बड़ा बदलाव लाती है। पहले अधिकांश राज्यों में निवेशकों को निश्चित प्रोत्साहन सूची दी जाती थी, लेकिन पंजाब ने इसे बदलते हुए निवेशकों को अपनी जरूरत के अनुसार प्रोत्साहन चुनने की सुविधा दी है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग उद्योगों की लागत संरचना अलग होती है, इसलिए नई नीति उद्योगों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

 

उन्होंने बताया कि नीति की एक और प्रमुख विशेषता यह है कि अब केवल नए निवेशक ही नहीं बल्कि पहले से काम कर रहे उद्योग भी आधुनिकीकरण, मशीनरी अपग्रेड और क्षमता विस्तार के लिए प्रोत्साहन प्राप्त कर सकेंगे।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नीति के तहत प्रोत्साहन सहायता की अवधि को बढ़ाकर 15 वर्ष तक किया गया है, जबकि अधिकांश राज्यों में यह अवधि 5 से 10 वर्ष तक होती है। इससे सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल और डेटा सेंटर जैसे पूंजी-प्रधान क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलेगा।

 

उन्होंने बताया कि नीति में फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट की परिभाषा का भी विस्तार किया गया है, जिसमें अब भूमि, श्रमिक आवास, अनुसंधान एवं विकास सुविधाएं, इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम जैसी सुविधाओं को शामिल किया गया है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे और मध्यम उद्योग पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसलिए रोजगार सृजन सब्सिडी की पात्रता घटाकर अधिक से अधिक एमएसएमई को इस नीति का लाभ देने का निर्णय लिया गया है।

 

उन्होंने बताया कि महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति और दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार देने वाले उद्योगों तथा आईटी/आईटीईएस क्षेत्र की कंपनियों को अधिक रोजगार सृजन सब्सिडी दी जाएगी।

 

इसके अलावा सीमा और कंडी क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है, ताकि पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और फाजिल्का जैसे जिलों में निवेश को बढ़ावा मिल सके।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 से अब तक पंजाब को लगभग 1.55 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से पिछले वर्ष ही करीब 55,000 करोड़ रुपये का निवेश आया है। उन्होंने बताया कि Tata Group, Infosys, Vardhman Group, Trident Group, HPCL‑Mittal Energy Limited और Fortis Healthcare जैसी कंपनियों ने भी राज्य में निवेश के लिए प्रतिबद्धता जताई है।

 

इस अवसर पर बिजली, उद्योग, वाणिज्य और निवेश प्रोत्साहन मंत्री संज़ीव अरोड़ा ने निवेशकों को 13-15 मार्च 2026 को मोहाली स्थित प्लाक्षा यूनिवर्सिटी में आयोजित प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन-2026 में भाग लेने का निमंत्रण दिया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नई नीति निवेशक-अनुकूल ढांचे, लचीले प्रोत्साहनों, क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन के माध्यम से पंजाब के औद्योगिक विकास को नई गति देगी और राज्य को निवेश तथा उद्योग के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी।

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