
चंडीगढ़, 14 अप्रैल 2026:
पंजाब पुलिस की महिला अधिकारी आधुनिक पुलिसिंग के मोर्चों पर एक निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रही हैं। वे प्रमुख ऑपरेशनों की अगुवाई करते हुए भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार के ‘अपराध और गैंगस्टर-मुक्त पंजाब’ के प्रयासों को लगातार मजबूत कर रही हैं। गैंगस्टर विरोधी अभियानों की निगरानी से लेकर सामुदायिक पहल को आगे बढ़ाने तक, ये अधिकारी न केवल आपराधिक नेटवर्क को तोड़ रही हैं बल्कि पुलिस नेतृत्व की नई परिभाषा भी गढ़ रही हैं।
लीडरशिप भूमिकाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने पंजाब पुलिस को देश की सबसे प्रगतिशील पुलिस बलों में शामिल कर दिया है। महिला अधिकारी ‘गैंगस्टरों पर वार’ और ‘ऑपरेशन प्रहार’ जैसे अभियानों का नेतृत्व कर रही हैं, जिससे वे राज्य को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन रही हैं।
राज्य सरकार के समर्थन से 79 महिला अधिकारी विभिन्न उच्च पदों पर कार्यरत हैं—स्पेशल डीजीपी से लेकर डीएसपी तक। इनमें 4 एसडीजीपी, 1 एडीजीपी, 2 आईजीपी/सीपी, 2 डीआईजी, 18 एसएसपी/एआईजी/कमांडेंट, 23 एसपी, 1 एएसपी और 28 डीएसपी शामिल हैं। इनमें से कई अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहकर गैंगस्टर विरोधी अभियानों में सीधे भाग ले रही हैं।
मजबूत शिक्षा और प्रशिक्षण के साथ महिला अधिकारियों ने ऑपरेशनल और प्रशासनिक दोनों क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित की है। वे तकनीकी रूप से दक्ष हैं और आधुनिक तरीकों से अपराध नियंत्रण में अहम भूमिका निभा रही हैं।
फरीदकोट की एसएसपी प्रज्ञा जैन ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में लिंग नहीं बल्कि क्षमता और समन्वय मायने रखते हैं। उन्होंने कहा, “पुलिसिंग साहस, योग्यता और प्रतिबद्धता पर आधारित है। महिला अधिकारियों ने इन सभी गुणों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।”
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक देर रात ऑपरेशन के दौरान महिला पीसीआर टीम ने स्थानीय महिलाओं से महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी हासिल की, जिससे अगले दिन अपराधियों की गिरफ्तारी संभव हो सकी।
फरीदकोट रेंज की आईजीपी निलांबरी जगदाले ने कहा कि यह अभियान आपराधिक नेटवर्क को जड़ से खत्म करने पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि गौरव यादव के दिशा-निर्देशों के तहत पुलिस टीमें राज्यभर में गैंगस्टरों, उनके सहयोगियों और नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही हैं।
‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के तहत अब तक 59,015 स्थानों पर छापेमारी की गई है और 21,154 गिरफ्तारियां हुई हैं, जबकि 888 भगोड़ों को भी पकड़ा गया है।
आईजीपी ने कहा कि नेतृत्व और साहस का लिंग से कोई संबंध नहीं होता। महिला और पुरुष अधिकारी मिलकर बेहतर तालमेल के साथ काम कर रहे हैं, जो एक प्रगतिशील समाज का संकेत है।
एसएसपी खन्ना डॉ. दर्पण आहलूवालिया ने सामुदायिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि “अपराध के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस नहीं जीत सकती, इसमें आम जनता का सहयोग भी जरूरी है।” ‘घर-घर संपर्क अभियान’ के तहत पुलिस टीमें सीधे लोगों से जुड़कर जानकारी जुटा रही हैं।
आधुनिक तकनीकों जैसे कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर डंप और आईपी डेटा विश्लेषण के जरिए पुलिस ने अपराधियों के नेटवर्क पर सटीक कार्रवाई की है। इन अभियानों ने आपराधिक गिरोहों के वित्तीय और लॉजिस्टिक ढांचे को भी कमजोर किया है।
कुल मिलाकर, पंजाब पुलिस की महिला अधिकारी न केवल कानून-व्यवस्था को मजबूत कर रही हैं, बल्कि एक सुरक्षित, अपराध-मुक्त और प्रगतिशील पंजाब के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं।








