
चंडीगढ़, 2 मई— मजदूर दिवस की पूर्व संध्या पर महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (मगसीपा) में आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करते हुए पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने कानूनी समुदाय से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा परिकल्पित संवैधानिक ढांचे की रक्षा करते हुए भारत की लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षक के रूप में कार्य करें। पंजाब के एडवोकेट जनरल कार्यालय के लॉ ऑफिसरों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कानूनी समुदाय के सदस्यों ने संवैधानिक सिद्धांतों की निरंतर प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श किया।
बाबा साहेब अंबेडकर के 135वें जन्मदिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार और एक दूरदर्शी अर्थशास्त्री के रूप में उनके अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डाला और कहा कि उन्होंने देश की प्रमुख वित्तीय संस्थाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान संदर्भ में उनके विचारों की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “बाबा साहेब अंबेडकर ने भारत को केवल संविधान ही नहीं दिया, बल्कि आर्थिक आधार भी प्रदान किया, जो आज भी देश का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनका न्याय, समानता और संस्थागत ईमानदारी का दृष्टिकोण हमारा मार्गदर्शक बना रहना चाहिए।”
लोकतांत्रिक संस्थाओं को दरपेश खतरों पर चिंता व्यक्त करते हुए वित्त मंत्री ने कानूनी पेशेवरों द्वारा संवैधानिक मूल्यों की सक्रिय रक्षा की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “संविधान की प्रस्तावना की मूल भावना इस समय खतरे में है, जिसके चलते लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा में वकीलों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।”
उन्होंने आगे कहा कि महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात और गोवा सहित कई राज्यों में हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और दलबदल, तथा ‘आप’ के राज्यसभा सदस्यों को शामिल करने के प्रयास एक चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं, जो कानूनी समुदाय से सतर्कता की मांग करती है।
देश की आर्थिक स्थिति पर ध्यान केंद्रित करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार द्वारा किए गए गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय कर्ज 2014 में 55 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर आज 212 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है,” और कहा कि ऐसे रुझान देश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करते हैं।
वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया वृद्धि की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, “चार राज्यों में चुनाव समाप्त होने के तुरंत बाद कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई।” उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले आम नागरिकों पर अनावश्यक बोझ डालते हैं और त्रुटिपूर्ण आर्थिक प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं।
पंजाब में प्रशासनिक सुधारों को उजागर करते हुए वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पारदर्शिता और सामाजिक न्याय को संस्थागत रूप देने के लिए उठाए गए कदमों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “पंजाब ने एडवोकेट जनरल के कार्यालय में लॉ ऑफिसरों की नियुक्ति के लिए आरक्षण नीति लागू कर एक राष्ट्रीय मिसाल कायम की है।” विपक्ष में रहते हुए इस कदम के लिए अपनी वकालत को याद करते हुए उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि पंजाब सरकार ने बाबा साहेब अंबेडकर के आदर्शों के अनुरूप इस प्रतिबद्धता को पूरा किया है।
अपने संबोधन के अंत में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने माननीय हाईकोर्ट में राज्य की नीतियों का बचाव करने के लिए लॉ ऑफिसरों और एडवोकेट जनरल मनिंदरजीत सिंह बेदी के निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “मैं राज्य की नीतियों का बचाव करने में उनके दृढ़ समर्पण की प्रशंसा करता हूं। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि भगवंत मान सरकार की जन-पक्षीय पहलों और कल्याणकारी नीतियों की रक्षा के लिए मजबूत और ठोस कानूनी दलीलें तैयार करते रहें।”









