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**पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम ने गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ पंजाब पुलिस को दी नई ताकत**

चंडीगढ़; 2 मई 2026: पंजाब में ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के तहत गैंगस्टरों और उनके सहयोगियों की साजिशों पर करारा प्रहार करते हुए, पंजाब पुलिस अब पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम (पीएआईएस) के अंतर्गत एक आधुनिक वॉयस रिकग्निशन सिस्टम से लैस हो गई है। यह प्रणाली विदेशों से संचालित हो रहे गैंग नेटवर्क में घुसपैठ करने और पंजाब के युवाओं को गैरकानूनी गतिविधियों की ओर भटकाने वाले तत्वों तक पहुंच बनाने में सहायक साबित हो रही है।

एआई सिस्टम के तहत एआई आधारित वॉयस रिकग्निशन सिस्टम में 84,000 से अधिक अपराधियों और संदिग्धों के वॉयस सैंपल का ‘वॉयस बैंक’ मौजूद है।

वॉयस पहचान से आगे बढ़ते हुए, इस एआई सिस्टम में 3,90,000 से अधिक अपराधियों का एक मजबूत डेटाबेस एकीकृत है, जिसमें उनकी गैंग संबंधी जानकारी और फोनेटिक सर्च जैसी विशेषताएं शामिल हैं। इसका उन्नत ‘गैंग ट्री सर्च’ टूल संगठित आपराधिक नेटवर्क की पूरी संरचना को विज़ुअल रूप में दर्शाता है, जिससे स्थानीय अपराधों से लेकर उनके अंतरराष्ट्रीय मास्टरमाइंड तक का पता लगाया जा सकता है।

पंजाब से जुड़े लगभग 60 खतरनाक गैंगस्टर कनाडा, अमेरिका, इटली समेत अन्य देशों से सक्रिय हैं। कानून लागू करने वाली एजेंसियां ‘रिमोट कंट्रोल’ फिरौती के नए ट्रेंड से जूझ रही हैं, जहां धमकियां एन्क्रिप्टेड ऐप्स और अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल नंबरों के जरिए दी जाती हैं।

इस प्रणाली के जरिए पंजाब पुलिस को ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान को और मजबूत करने के लिए तकनीकी रूप से उन्नत सहायता मिली है, जिससे स्मार्ट और डेटा-आधारित पुलिसिंग संभव हो रही है। यह अभियान, जो मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य को सुरक्षित बनाने के अपने शुरुआती उद्देश्य में सफल रहा है, अब संगठित अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को और मजबूत करेगा।

एडीजीपी, एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ), प्रमोद बान ने कहा, “कई वर्षों से विदेशों में बैठे गैंगस्टर तकनीक का दुरुपयोग करते हुए सुरक्षित ठिकानों से फिरौती रैकेट चला रहे हैं। ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के तहत पीएआईएस हमारे लिए एक नई ताकत साबित हुआ है, जिससे अपराध से निपटने की हमारी क्षमता काफी बढ़ गई है। एआई आधारित वॉयस मैचिंग हमें कुछ ही मिनटों में कॉलर की पहचान करने में सक्षम बनाती है, जिससे हम तेज और सटीक कार्रवाई कर सकते हैं।”

यह एआई सिस्टम अधिकारियों को अपराध होने से पहले ही उसे रोकने में भी मदद करता है। हालिया कार्रवाइयों में विदेशी हैंडलरों और स्थानीय सहयोगियों के बीच डिजिटल संचार को ट्रैक कर लक्षित हत्याओं की साजिशों को समय रहते विफल किया गया है।

उन्होंने आगे कहा, “पहले हम अलग-अलग घटनाओं से निपटते थे, लेकिन अब पीएआईएस के जरिए हम पूरे नेटवर्क पर नजर रख सकते हैं—कौन फंडिंग कर रहा है, कौन सहयोग कर रहा है और कौन कार्रवाई को अंजाम दे रहा है। यह इंटेलिजेंस-आधारित दृष्टिकोण हमें केवल किसी आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाय पूरे नेटवर्क को तोड़ने में मदद कर रहा है।”

इस तकनीक ने पंजाब पुलिस की एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) को पूरे नेटवर्क के खात्मे के लिए सक्षम बनाया है। इसके साथ ही विशेष फ्यूजिटिव ट्रैकिंग सेल, पीएआईएस की मदद से इंटरपोल जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग कर विदेशों में छिपे अपराधियों की पहचान और उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं।

श्री प्रमोद बान ने कहा, “ ‘गैंगस्टरों पर वार’ के तहत मजबूत किए गए फ्यूजिटिव ट्रैकिंग सेल अब पीएआईएस से मिलने वाली रियल-टाइम इंटेलिजेंस से लैस हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग बढ़ा है और विदेशों में छिपे अपराधियों को वापस लाने की क्षमता मजबूत हुई है।”

उन्होंने कहा, “यह पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़ते हुए प्रिडिक्टिव पुलिसिंग की ओर एक बड़ा कदम है। अब हम खतरे की पहचान कर सकते हैं, बातचीत को ट्रैक कर सकते हैं और अपराध होने से पहले ही कार्रवाई कर सकते हैं। एआई की असली ताकत यही है। हमारा संदेश साफ है—अपराधी कहीं भी हों, उन्हें ट्रैक कर कानून के कटघरे में लाया जाएगा।”

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