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Jasvir Singh Garhi ने जनगणना 2027 के लिए तैयार किए गए फॉर्म में अनुसूचित जातियों के लोगों के लिए प्रतिबंधित शब्दों के इस्तेमाल के मामले को लेकर National Commission for Scheduled Castes के चेयरमैन से मुलाकात की।

चंडीगढ़, 19 मई: भारत सरकार द्वारा जनगणना 2027 के लिए तैयार किए गए फॉर्म में अनुसूचित जातियों के लोगों के लिए प्रतिबंधित शब्दों के इस्तेमाल के मामले को लेकर Jasvir Singh Garhi ने आज National Commission for Scheduled Castes के चेयरमैन से मुलाकात की और इन प्रतिबंधित शब्दों के उपयोग को रुकवाने के लिए एक मांग पत्र भी सौंपा।

इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के प्रवक्ता ने बताया कि जनगणना 2027 की सूचियों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर अनुसूचित जातियों के लिए इस्तेमाल की गई अपमानजनक और समाज विरोधी शब्दावली को तुरंत हटाने के लिए राष्ट्रीय आयोग से संपर्क किया गया है।

प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले में पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पास दर्ज एक शिकायत (नंबर 1211/26/पीएसएससीसी/5325-26) का संज्ञान लेते हुए चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकारी दस्तावेजों में इस तरह के शब्दों का लगातार इस्तेमाल भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का उन्मूलन) और अनुच्छेद 21 (सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।

पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में मुख्य रूप से सभी आपत्तिजनक शब्दों को जनगणना फॉर्मेट और सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल से तुरंत हटाने की मांग की गई है। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए आवश्यक उपाय सुझाए गए हैं।

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