
जिला होशियारपुर में ब्लॉक प्राइमरी एजुकेशन का धुरा एजुकेशन ऑफिसर (बीपीईओ) के 76 फीसदी पद खाली हैं। जिले में प्रारंभिक शिक्षा के 21 ब्लॉक हैं, जिनमें से केवल पांच ब्लॉको में ही नियमित प्राइमरी शिक्षा अधिकारी बीपीइओ कार्यरत हैं। जबकि 16 ब्लॉक लंबे समय से प्राइमरी शिक्षा अधिकारी विहीन चल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि होशियारपुर शहर के चार प्राथमिक शिक्षा ब्लॉकों में से तीन बीपीईओ के पद खाली हैं। शिक्षा विभाग बीपीइओ के पद भरने की वजाय ब्लॉक नोडल ऑफिसर बीएनओ के नए पद सृजित कर रहा है। बीएनओ का मतलब है सैसेन्ट हैड टीचर में से वरिष्ठ सीएचटी को ब्लॉक नोडल अधिकारी नियुक्त करना। जिला शिक्षा अधिकारी प्रो. हरजिंदर सिंह ने बताया कि इस समय नियमित बीपीइओ तलवाड़ा, टांडा-1-2, बुलोवाल और होशियारपुर-1बी में ही कार्यरत हैं। बीपीइओ बुलोवाल ने प्री.मैच्योर रिटायरमेंट और बीपीईओ तलवाड़ा अमरेंद्रपाल सिंह ढिल्लों ने हेडमास्टर के लिए केस भेज दिए हैं, उनके जाने से जिले में सिर्फ तीन बीपीइओ रह जाएंगे।
जिला शिक्षा आधिकारी ने माना कि बीपीईओ की कमी के कारण प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में गिरावट आयी है। जिले के 1226 सरकारी प्रारंभिक विद्यालयों में पढऩे वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। बीपीईओ टाडा-दो सुरती लाल विरदी ने कहा कि उनके पास ब्लॉक भूंगा-एक और दो के अलावा होशियारपुर-दो का अतिरिक्त चार्ज है। ऐसे में बीपीइओ सिर्फ वित्तीय मामले ही देख सकते हैं, ब्लॉक के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं पर विचार करने का उनके पास समय ही नहीं रहता है। ै। पिछले साल बीपीइओ की कमी के कारण इन्हें विभाग से मंजूरी नहीं मिली थी। जिला प्राइमरी शिक्षा अधिकारी हरजिंदर सिंह ने कहा कि बीपीईओ की भारी कमी है।









