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महाराष्ट्र में हिंदी नहीं होगी अनिवार्य भाषा, फडऩवीस सरकार ने प्रदेश में विरोध के बाद बदला फैसला

मुंबई

महाराष्ट्र में स्कूली पढ़ाई के लिए अब हिंदी अनिवार्य भाषा नहीं होगी। राज्य की फडऩवीस सरकार ने हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बनाने का निर्णय वापस ले लिया है। शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने कहा कि मराठी अनिवार्य होगी, अंग्रेजी दूसरी भाषा और तीसरी भाषा ऑप्शनल यानी वैकल्पिक होगी। इससे पहले गत रविवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस ने भी कहा था कि छात्र तीसरी भाषा अपने मन से चुन सकेंगे। हिंदी अनिवार्य नहीं होगी।

आपको बता दें कि फैसला वापस लेने से सात दिन पहले यानी गत बुधवार को ही महाराष्ट्र में पहली से पांचवीं तक के छात्रों के लिए तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी अनिवार्य की गई थी। यह फैसला राज्य के सभी मराठी और अंग्रेजी मीडियम स्कूलों पर लागू किया गया था। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी-2020 के नए करिकुलम को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र में इन क्लासेज के लिए तीन भाषा की पॉलिसी लागू की गई थी। हालांकि राज ठाकरे की मनसे समेत उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया था और कई जगह प्रदर्शन भी किए गए थे।

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