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रियलिटी लिमिटेड (“कंपनी”) ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाइयों से संबंधित हालिया घटनाक्रमों के संदर्भ में अपना स्पष्टीकरण जारी किया।

9 मई 2026 | नई दिल्ली, हैम्पटन स्काई

हैम्पटन स्काई रियलिटी लिमिटेड (“कंपनी”) ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया कार्रवाइयों के संदर्भ में अपना विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उसे स्थापित तथ्यों, देश की कानूनी एवं संवैधानिक व्यवस्था तथा न्यायपालिका की निष्पक्षता पर पूरा विश्वास है।

कंपनी ने कहा कि मोबाइल फोन निर्माण और निर्यात भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ तथा प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत प्राथमिकता वाला क्षेत्र है। वित्त वर्ष 2014-15 में लगभग 1,500 करोड़ रुपये का मोबाइल फोन निर्यात बढ़कर 2024-25 में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इसी क्षेत्रीय वृद्धि को देखते हुए कंपनी ने मई 2023 में मोबाइल फोन निर्यात कारोबार में प्रवेश किया।

कंपनी के अनुसार, उसने ब्रांडेड मोबाइल हैंडसेट और एक्सेसरीज़ की कुल 44,471 यूनिट निर्यात कीं, जिनमें मुख्य रूप से Apple Inc. के iPhone और AirPods, Samsung Electronics के हैंडसेट तथा OnePlus के उत्पाद शामिल थे। कंपनी ने दावा किया कि ये सभी उत्पाद असली और प्रमाणित थे।

कंपनी ने कहा कि प्रत्येक निर्यात की पुष्टि कई स्वतंत्र और वैधानिक स्तरों पर की गई, जिनमें दिल्ली एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में कस्टम विभाग की जांच, IMEI स्कैनिंग, OEM कंपनियों द्वारा ग्लोबल एक्टिवेशन डेटाबेस से सत्यापन, यूएई कस्टम्स द्वारा आयात पुष्टि तथा अधिकृत बैंकों द्वारा बैंक रियलाइजेशन सर्टिफिकेट (BRC) जारी करना शामिल है।

स्पष्टीकरण में कहा गया कि हर मोबाइल फोन का 15 अंकों वाला IMEI नंबर उसकी विशिष्ट पहचान होता है और कंपनी द्वारा निर्यात किए गए 16,391 IMEI नंबरों को OEM कंपनियों ने स्वतंत्र रूप से भारत के बाहर सक्रिय किए गए वास्तविक उपकरणों के रूप में प्रमाणित किया है। कंपनी का कहना है कि इससे निर्यात की वास्तविकता संदेह से परे सिद्ध होती है।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्यात से प्राप्त पूरी राशि वैध बैंकिंग चैनलों के माध्यम से भारत में प्राप्त हुई और घरेलू सप्लायर्स को भुगतान भी पूरी तरह बैंकिंग माध्यम से किया गया। कंपनी ने कहा कि किसी भी प्रकार की “राउंड-ट्रिपिंग” या फर्जी निर्यात की आशंका निराधार है, क्योंकि कोई धन विदेशों में नहीं रोका गया और न ही किसी गुप्त खाते में स्थानांतरित किया गया।

जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट संबंधी चिंताओं पर कंपनी ने कहा कि मामला कुछ घरेलू सप्लायर्स तक सीमित है और कंपनी स्वयं इस कथित धोखाधड़ी की पीड़ित है। कंपनी ने बताया कि उसने 17 मई 2025 को लुधियाना के फोकल प्वाइंट थाने में SK Enterprises, Global Traders और GMG Tradelink Private Limited के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी।

कंपनी ने कहा कि संबंधित जीएसटी राशि पहले ही जमा करवाई जा चुकी है और मामला जीएसटी अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष विचाराधीन है। इसलिए सरकारी खजाने को किसी प्रकार का वर्तमान नुकसान नहीं हुआ है।

अंत में कंपनी ने कहा कि वह सभी जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और कानून के अनुरूप सभी आवश्यक दस्तावेज एवं रिकॉर्ड संबंधित मंचों के समक्ष प्रस्तुत करेगी। कंपनी ने विश्वास जताया कि तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर सत्य की जीत होगी।

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