
चंडीगढ़, 9 मई: सुबह की हल्की धूप में 68 वर्षीय बीबी हरबंस कौर अपने हाथों में एक छोटा सा बैग पकड़े बस में चुपचाप बैठी थीं। उनकी आंखें नम थीं, लेकिन चेहरे पर गहरी शांति और चमक थी, मानो वर्षों पुराना कोई अधूरा सपना आखिरकार पूरा होने जा रहा हो। उन्होंने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “मुझे तो हमेशा यही लगता था कि यह दिन मेरी किस्मत में नहीं लिखा।”
यह कहानी केवल बीबी हरबंस कौर की नहीं, बल्कि पूरे पंजाब के हजारों बुजुर्गों की लंबे समय से दबाई गई इच्छाओं की अभिव्यक्ति है। आज ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ के माध्यम से ऐसे बुजुर्गों की वर्षों पुरानी मनोकामनाएं पूरी हो रही हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के गतिशील नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल पंजाब सरकार की बुजुर्गों को सम्मानजनक, आरामदायक और आध्यात्मिक आनंद से भरपूर तीर्थ यात्रा करवाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सुविचारित प्रबंधन और बड़े स्तर पर वित्तीय एवं मानव संसाधनों के उपयोग के कारण यह योजना जनसेवा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रही है।
इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए पंजाब के राजस्व मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने बताया कि 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के 1100 से अधिक बुजुर्ग श्रद्धालु प्रतिदिन इस योजना के तहत तीर्थ यात्रा कर रहे हैं। उनके आराम, सुरक्षा और स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए 900 से अधिक स्टाफ सदस्य तैनात किए गए हैं, जो यात्रा के हर चरण में श्रद्धालुओं की पूरी देखभाल करते हैं और हर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराते हैं।
पंजाब, जिसकी धरती के कण-कण में समृद्ध आध्यात्मिक विरासत बसी हुई है, वहां हर परिवार में श्रद्धा और आस्था की गहरी भावना देखने को मिलती है। कई बुजुर्गों के लिए पवित्र स्थल श्री हरिमंदिर साहिब के दर्शन करना कभी अधूरा सपना हुआ करता था, जो आर्थिक कठिनाइयों या खराब स्वास्थ्य के कारण पूरा नहीं हो पाता था। इस योजना ने उस सपने को साकार कर दिया है।
इस योजना के तहत श्रद्धालुओं को प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की निःशुल्क यात्रा करवाई जाती है। यात्रा कार्यक्रम में श्री दुर्गियाना मंदिर और भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल के दर्शन के साथ-साथ जलियांवाला बाग हत्याकांड से जुड़े जलियांवाला बाग और पार्टिशन म्यूजियम जैसे महत्वपूर्ण विरासत स्थलों का भ्रमण भी शामिल है, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और ऐतिहासिक अनुभव का अनूठा संगम प्रदान करते हैं।
उन्होंने बताया कि यह तीन दिन और दो रातों की यात्रा इस प्रकार व्यवस्थित की गई है कि हर श्रद्धालु को पूरा आराम और सभी सुविधाएं मिल सकें। सरकार की ओर से वातानुकूलित बसें और रेलगाड़ियां, ठहरने की अग्रिम व्यवस्था, स्वच्छ भोजन, चादरें, कंबल जैसी दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सीय सुविधाएं भी पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं। यात्रा का हर पहलू बुजुर्ग यात्रियों की जरूरत, सुविधा और सम्मान को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि कम समय में ही इस पहल का व्यापक प्रभाव देखने को मिला है। लगभग 100 बसों का काफिला प्रतिदिन करीब 1100 श्रद्धालुओं को तीर्थ यात्रा पर लेकर जाता है और अब तक लगभग 1,10,000 बुजुर्ग इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। अधिकांश बुजुर्गों के लिए यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवनभर अधूरी रही इच्छा की पूर्ति का माध्यम बन गई है। जो कभी बहुत दूर लगता था, वह अब सुलभ हो चुका है।
उन्होंने कहा कि हजारों बुजुर्ग अब पूरे सम्मान और आराम के साथ उन आध्यात्मिक क्षणों का आनंद ले रहे हैं, जिनका वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।









