
चंडीगढ़, 30 दिसंबर:
भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना को खत्म कर नई कथित योजना के माध्यम से गरीबों को गुमराह करने के निराशाजनक कदम पर भाजपा को करारे हाथों लेते हुए, पंजाब के कैबिनेट मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राज्य अध्यक्ष श्री अमन अरोड़ा ने “विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)”, वीबी-जी राम जी को केंद्र सरकार की सोची-समझी चाल बताया ताकि गरीबों को रोजगार की गारंटी देने से बचा जा सके।
16वीं पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान वीबी-जी राम जी पर लाए गए सरकारी प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान श्री अरोड़ा ने इस नई योजना को चुनौती देते हुए कहा, “उनकी ओर से पंजाब में ‘औसत’ 26 दिन रोजगार दिए जाने की बात कही जा रही है। अगर हम इस संदेहास्पद औसत को मान भी लें, तो मेरा सवाल है कि फिर नई योजना के तहत रोजगार को 100 से 125 दिनों तक बढ़ाने का क्या मकसद है? यह लोगों को मूर्ख बनाने के अलावा कुछ नहीं है। अगर किसी मनरेगा मजदूर को 6-8 महीने तक मजदूरी नहीं मिलेगी, तो क्या वह काम पर आएगा? भले ही पंचायतें प्रोजेक्ट शुरू करना चाहें, अगर केंद्र से फंड जारी नहीं किए जाते हैं तो वे भुगतान कैसे करेंगे? केंद्र द्वारा इस योजना को आप ने खत्म किया है।”
श्री अरोड़ा ने कहा कि पहले मनरेगा मांग-आधारित थी और मजदूरों की जरूरत के अनुसार उन्हें काम की गारंटी दी जाती थी। अब इसे सप्लाई-आधारित बना दिया गया है। दिल्ली में बैठे केंद्र यह फैसला करेगा कि कौन से राज्य, जिले, ब्लॉक और गांव को काम मिलेगा। उन्होंने गारंटीड रोजगार योजना की आत्मा खत्म कर दी है।
भाजपा विधायक अश्वनी शर्मा के सामने चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए श्री अरोड़ा ने कहा कि केवल पंजाब में हमारे पास लगभग 30.20 लाख जॉब कार्ड धारक हैं। अगर आप उन्हें 346 रुपये प्रति दिन मजदूरी पर 125 दिन काम देने का वादा करते हैं, तो इसके लिए 13,062 करोड़ रुपये से अधिक बजट की आवश्यकता होगी। पूरे देश में 15.5 करोड़ जॉब कार्ड धारकों को 346 रुपये प्रति दिन पर 125 दिनों का काम देने के लिए 6.70 लाख करोड़ रुपये चाहिए होंगे, जो देश के पूरे रक्षा बजट के बराबर है। अगर केंद्र सरकार आगामी बजट में यह राशि देने का वादा करती है, तभी हम उनके द्वारा दी गई रोजगार गारंटी पर विश्वास कर सकते हैं। नहीं तो, यह गरीबों के साथ एक बेरहम धोखा है।
मनरेगा में भ्रष्टाचार के आरोपों पर विपक्ष को घेरे हुए श्री अरोड़ा ने कहा कि ये घोटाले अकाली-भाजपा और कांग्रेस के शासनकाल के दौरान हुए थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने पैसों की हेराफेरी की, मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने जनता से लूटे गए 2 करोड़ रुपये वसूल किए हैं और 42 व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई भी की है।
अधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए श्री अरोड़ा ने बताया कि 2005 से पंजाब को मनरेगा के तहत 11,700 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। अकाली-भाजपा गठजोड़ (2007-2017) के 10 साल के शासन दौरान, पंजाब में इस योजना के तहत सिर्फ 1988 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और कांग्रेस के 5 सालों (2017-2022) में मनरेगा के तहत 4708 करोड़ रुपये ही इस्तेमाल हुए। इसके उलट मुख्यमंत्री मान की अगुवाई वाली आप सरकार के केवल साढ़े तीन साल के शासनकाल में 5,131 करोड़ रुपये गरीबों के घरों तक पहुंचाना सुनिश्चित किया गया, हालांकि केंद्र ने इस योजना के तहत कई महीनों तक फंड भी रोके रखे।
पिछली सरकारों के दौरान मुक्तसर, गिद्धड़बाहा, अबोहर और फाजिल्का, जो कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और भाजपा के राज्य अध्यक्ष सुनील कुमार जाखड़ के गढ़ थे, में हुए मनरेगा घोटालों की जांच के लिए मुख्यमंत्री को अपील करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष के अपने नेता घोटालों में शामिल थे। अब वे मगरमच्छ के आँसू बहा रहे हैं, लेकिन हम उन्हें पंजाब के लोगों को गुमराह नहीं करने देंगे।









