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पंजाब पुलिस ने वल्टोहा सरपंच हत्याकांड की गुत्थी सुलझाई: दो शूटरों समेत सात गिरफ्तार

चंडीगढ़, 12 जनवरी:
वल्टोहा के पूर्व सरपंच झरमल सिंह की हत्या की गुत्थी को महज कुछ ही दिनों में सुलझाते हुए, कमिश्नरेट पुलिस अमृतसर ने प्रभ दासूवाल गैंग को करारा झटका देते हुए गैंग के दो शूटरों समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की संगठित अपराध के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए कहा कि पंजाब में सक्रिय अपराधी नरक में भी छिप नहीं सकेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि पंजाब पुलिस हिंसक गतिविधियों में शामिल हर व्यक्ति को देश में या देश से बाहर किसी भी कोने से पकड़कर कानून के कटघरे में लाएगी।
पुलिस जांच के अनुसार इस हत्या का मास्टरमाइंड गैंगस्टर प्रभ दासूवाल है, जिसने पुरानी दुश्मनी के चलते योजनाबद्ध और लक्षित तरीके से इस हत्या को अंजाम दिया। डीजीपी, जिनके साथ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक काउंटर इंटेलिजेंस अमित प्रसाद, पुलिस महानिरीक्षक मुख्यालय डॉ. सुखचैन सिंह गिल और पुलिस कमिश्नर अमृतसर गुरप्रीत सिंह भुल्लर मौजूद थे, ने बताया कि इस मामले में मिली त्वरित सफलता संगठित अपराध के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के प्रति पंजाब पुलिस के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।
डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सुखराज सिंह उर्फ गूंगा (20) निवासी ठक्करपुरा, तरनतारन; करमजीत सिंह (23) निवासी गांव पसनावाल, गुरदासपुर; जोबनप्रीत सिंह (19) निवासी गांव भाई लद्धू, तरनतारन; हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी (27) निवासी गांव बहादर नगर, तरनतारन; जोबनप्रीत सिंह (20), कुलविंदर सिंह उर्फ किंदू (20) और अरमानदीप सिंह (18), तीनों निवासी गांव कलसियां कलां, तरनतारन के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि सुखराज सिंह उर्फ गूंगा का आपराधिक रिकॉर्ड है और उसके खिलाफ चोरी और आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हैं, साथ ही वह सरपंच राजविंदर सिंह उर्फ राज हत्याकांड में भी शामिल रहा है।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि जांच से पता चला है कि गैंगस्टर प्रभ दासूवाल की मृतक पूर्व सरपंच के साथ पुरानी दुश्मनी थी और उसने पहले भी उस पर गोलीबारी की थी, जो स्पष्ट रूप से योजनाबद्ध और सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करती है। उन्होंने कहा कि इस केस को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया गया और हत्या की जांच के लिए कई विशेष टीमें गठित की गई थीं।
डीजीपी ने बताया कि तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस टीमों ने अपराध में शामिल दोनों शूटरों—सुखराज सिंह उर्फ गूंगा और करमजीत सिंह—की पहचान की।
उन्होंने कहा कि लगातार अंतर-राज्यीय समन्वय, खुफिया एजेंसियों के नेतृत्व में ट्रैकिंग और केंद्रीय एजेंसियों तथा छत्तीसगढ़ पुलिस के निकट सहयोग से दोनों शूटरों को रायपुर, छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने आगे बताया कि दोनों आरोपी महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पंजाब और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में जानबूझकर ठिकाने बदल रहे थे और अपनी पहचान छिपाने तथा पुलिस गिरफ्तारी से बचने के लिए फर्जी आधार कार्डों का इस्तेमाल कर रहे थे।
डीजीपी ने बताया कि एक अन्य पुलिस टीम ने एसएसओसी मोहाली की मदद से दो अन्य आरोपियों (दोनों का नाम जोबनप्रीत सिंह) को मोहाली से गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी को वल्टोहा से गिरफ्तार किया गया, जबकि कुलविंदर सिंह उर्फ किंदू और अरमानदीप सिंह को तरनतारन के भिखीविंड क्षेत्र से पकड़ा गया। आगे जांच में सामने आया है कि इन पांचों आरोपियों ने शूटरों को रसद, पनाह, हथियार और मोटरसाइकिल उपलब्ध कराकर साजिश में अहम भूमिका निभाई थी।
डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि जांच से यह भी सामने आया है कि गोली चलाने वाले और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करने वाले आरोपी एक-दूसरे को नहीं जानते थे और प्रभ दासूवाल के निर्देशों पर स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे।
अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का जिक्र करते हुए डीजीपी ने कहा कि नशा विरोधी मुहिम की सफलता के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार विदेशों में बैठे अपराधियों की प्रत्यर्पण पर ध्यान केंद्रित करते हुए संगठित अपराध के खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू करने जा रही है।
डीजीपी गौरव यादव ने सीमावर्ती राज्य से संगठित अपराध के खात्मे के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पंजाब में हिंसक गतिविधियों या गोलीबारी में शामिल हर व्यक्ति को पंजाब पुलिस देश में या देश से बाहर कहीं भी छिपा हो, पकड़कर कानून के कटघरे में लाएगी।

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