पंजाबराजनीति

शहरी स्थानीय निकायों में त्वरित मंजूरियां, विकेंद्रीकृत निर्णय प्रक्रिया और मिशन-मोड शहरी विकास जैसे प्रमुख प्रशासनिक सुधार लागू किए गए: संजीव अरोड़ा

चंडीगढ़, 4 फरवरी:

 

पंजाब के स्थानीय सरकारों, उद्योग एवं वाणिज्य, बिजली तथा निवेश प्रोत्साहन संबंधी कैबिनेट मंत्री सरदार संजीव अरोड़ा ने आज कहा कि राज्य सरकार ने पूरे पंजाब में विकास कार्यों को समयबद्ध निर्णयों, पारदर्शिता और निर्बाध क्रियान्वयन के साथ सुनिश्चित करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबीज़) में प्रशासनिक, वित्तीय और संरचनात्मक सुधार लागू किए हैं।

 

यूएलबीज़ के कामकाज की समीक्षा करते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि प्रस्तावों और मंजूरियों के लंबित रहने से विकास और सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। उन्होंने आगे बताया कि माननीय राष्ट्रीय संयोजक श्री अरविंद केजरीवाल और माननीय मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के सक्षम नेतृत्व में इस समस्या के समाधान हेतु राज्य सरकार ने दैनिक निगरानी, प्रणालीगत पुनर्गठन और सख्त समय-सीमाओं के माध्यम से सुधार-आधारित, विकेंद्रीकृत और जवाबदेही-आधारित शासन ढांचे को अपनाया है।

 

इसके परिणामस्वरूप लंबित प्रस्तावों के बड़े बैकलॉग को साफ किया गया है। कुल 1100 लंबित प्रस्तावों में से पिछले तीन सप्ताहों में शहरी बुनियादी ढांचे और शहरी विकास कार्यों को गति देते हुए 900 प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें से कुछ प्रस्ताव वर्ष 2018 से लंबित थे। शेष मामलों की प्रक्रिया जारी है और शीघ्र निपटारे की उम्मीद है।

 

इन सुधारों को संस्थागत रूप देने के लिए 01.02.2026 से ई-नगरम सॉफ्टवेयर लागू किया गया है, जिससे सभी यूएलबीज़ में प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रोसेसिंग की जा सके। यह महत्वपूर्ण कदम न केवल मैनुअल प्रक्रियाओं से निर्णायक बदलाव का संकेत देता है, बल्कि गति, पारदर्शिता, ट्रैकिंग और जवाबदेही भी सुनिश्चित करता है। भविष्य में लंबित मामलों के समाधान हेतु और अधिक प्रक्रियात्मक सरलीकरण तथा विकेंद्रीकरण किया जा रहा है।

 

वित्तीय शक्तियों में वृद्धि और त्वरित परियोजना मंजूरियां

 

सरदार संजीव अरोड़ा ने घोषणा की कि फील्ड स्तर पर विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए वित्तीय मंजूरी से संबंधित शक्तियों में महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। अब सुपरिंटेंडिंग इंजीनियरों (एसई) को 1 करोड़ रुपये की पूर्व सीमा के बजाय 2 करोड़ रुपये तक की वित्तीय मंजूरी देने की शक्ति प्रदान की गई है।

 

मुख्य इंजीनियर (सीई) अब 10 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी दे सकते हैं, जो पहले की 5 करोड़ रुपये की सीमा से दोगुनी है।

 

एक अन्य बड़े सुधार के तहत, मुख्य कार्यालय स्तर पर अड़चनों और शून्य लंबितता सुनिश्चित करने के लिए एक समिति के स्थान पर मुख्य इंजीनियरों की दो समितियों का गठन किया गया है।

 

कैबिनेट मंत्री ने निर्देश दिए कि सभी प्रस्तावों, परियोजना जांच, तकनीकी स्वीकृतियों और स्थानीय सरकारों से संबंधित अनुमोदनों को सख्त 10 कार्यदिवसों की समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा, जिससे समयबद्ध प्रशासन और अधिकारियों की जवाबदेही और मजबूत होगी।

 

इंजीनियरिंग कैडर और क्षेत्रीय ढांचे का युक्तिकरण

 

सरदार अरोड़ा ने बताया कि भौगोलिक और प्रशासनिक आधार पर सभी शहरी स्थानीय निकायों को छह क्षेत्रों—अमृतसर, बठिंडा, फिरोजपुर, जालंधर, लुधियाना और पटियाला—में पुनर्गठित किया गया है।

 

नए ढांचे के तहत प्रत्येक क्षेत्र के लिए एक मुख्य इंजीनियर नियुक्त किया गया है, जो नगर निगमों और नगर परिषदों की निगरानी करेगा, जिसमें बी एंड आर तथा ओ एंड एम से संबंधित कार्य शामिल हैं। प्रत्येक क्षेत्र में एक सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर और प्रत्येक जिले में एक उप-मंडल इंजीनियर की तैनाती की गई है।

 

इस युक्तिकरण का उद्देश्य बेहतर समन्वय, क्षेत्रीय स्तर की निगरानी को मजबूत करना और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना है।

 

रेट कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से मिशन-मोड सीवर लाइन सफाई

 

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि रेट कॉन्ट्रैक्ट के तहत सीवर लाइनों की सफाई के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिसमें 161 शहरी स्थानीय निकायों के कार्य पहले ही पूरे किए जा चुके हैं। पांच प्रमुख नगर निगमों—अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, बठिंडा और पटियाला—के लिए टेंडरिंग अंतिम चरण में है और इस कार्य हेतु छह एजेंसियों को सूचीबद्ध किया गया है।

 

उन्होंने आगे बताया कि नगर परिषदों को बार-बार टेंडर जारी करने से छूट दी गई है, जिससे पहले से अनुमोदित ठेकेदारों के माध्यम से शीघ्र कार्य आरंभ हो सके और देरी कम हो। इकाई दरें निर्धारित कर सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए सार्वजनिक धन को मूल्य उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रखा है। ये कॉन्ट्रैक्ट मानसून से पहले सीवर लाइनों की मिशन-मोड सफाई सुनिश्चित करने के लिए तैयार किए गए हैं।

 

उन्होंने यह भी कहा कि “एक शहर, एक संचालक” योजना के तहत नगर निगमों के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं और शीघ्र ही इनका कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।

 

अमृत 2.0 और एसबीएम (शहरी) 2.0 के तहत जलापूर्ति और सीवरेज बुनियादी ढांचा

 

सरदार संजीव अरोड़ा ने बताया कि अमृत 2.0 के तहत भूजल से नहरी जल आपूर्ति की ओर एक बड़ा परिवर्तन लागू किया जा रहा है। वर्तमान में 609 एमएलडी की कुल क्षमता वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) 90 कस्बों में कार्यरत हैं, जिससे 148 कस्बों में 100 प्रतिशत जलापूर्ति कवरेज सुनिश्चित हो रही है। इसके अतिरिक्त, 3,626 करोड़ रुपये की कुल लागत से 87 एमएलडी की संयुक्त क्षमता वाले चार सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) योजना के अंतर्गत स्थापित किए जा रहे हैं।

 

एसबीएम (शहरी) 2.0 के बारे में उन्होंने बताया कि 56 कस्बों में कुल 213 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी विकसित किए जा रहे हैं। इस योजना के तहत 1,647 करोड़ रुपये की कुल लागत से 730 सीवर-सफाई मशीनों की खरीद की जा चुकी है।

 

सरदार संजीव अरोड़ा ने कहा कि ये सुधार पंजाब में शहरी शासन की व्यापक परिवर्तन प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारा ध्यान तेज़ सेवा-प्रदान, पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और नागरिक सेवाओं में प्रत्यक्ष सुधार पर केंद्रित है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button