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स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मरीजों को बेहतर देखभाल सेवाएं प्रदान करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।

चंडीगढ़, 17 फरवरी:

 

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज सिविल सर्जनों और डिप्टी मेडिकल कमिश्नरों के साथ राज्य-स्तरीय सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए जहाँ राज्य सरकार के प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की समीक्षा की, वहीं प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के अगले चरण की रूप-रेखा भी प्रस्तुत की। समीक्षा बैठक के दौरान मरीजों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल सेवाएँ उपलब्ध कराने, डिजिटल सुधारों, बुनियादी ढांचे के उन्नयन तथा जिलों में सख्त निगरानी तंत्र पर विशेष जोर दिया गया।

 

राज्य की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले आम आदमी क्लीनिकों पर प्रकाश डालते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पूरे राज्य में 881 आम आदमी क्लीनिक कार्यरत हैं, जहाँ बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले महीने के दौरान इन क्लीनिकों में गर्भवती महिलाओं की संख्या में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इन क्लीनिकों में उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के रूप में चिन्हित मामलों का अनुपात राज्य स्तर पर 29 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जिससे प्रारंभिक चिकित्सकीय हस्तक्षेप संभव हो रहा है और माताओं व नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा की जा रही है।

 

डॉ. बलबीर सिंह ने घोषणा की कि शीघ्र ही 243 नए आम आदमी क्लीनिक स्थापित किए जाएंगे, जबकि 308 उप-स्वास्थ्य केंद्रों को आम आदमी क्लीनिकों के रूप में उन्नत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नई सेवाओं में नवजात एवं बाल देखभाल, नियमित टीकाकरण तथा मुख और प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग शामिल होगी। उन्होंने ब्लॉक स्तर पर रेफरल मामलों को कम करने और अधिक उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ब्लॉक-स्तरीय संस्थानों को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

 

दवाइयों की उपलब्धता पर बात करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने स्टॉक की कमी के प्रति शून्य सहनशीलता बनाए रखने के सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि 14 जिलों ने आम आदमी क्लीनिकों में 102 आवश्यक दवाइयों में से कम से कम 97 दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टॉक में किसी भी प्रकार की कमी की स्थिति में संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले प्रत्येक मरीज को निर्धारित दवाइयाँ और जांच सेवाएँ निःशुल्क उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। निर्बाध आपूर्ति के लिए ई-औषधि और जिला-स्तरीय डैशबोर्ड के माध्यम से निगरानी को तेज किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना की समीक्षा करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इस योजना के तहत प्रति परिवार सालाना 10 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य चिकित्सा आपात स्थितियों में परिवारों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को पूरी तरह कम करना है। उन्होंने सिविल सर्जनों को सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्बाध पंजीकरण और सेवाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी पात्र लाभार्थी इलाज से वंचित न रहे। अधिकतम पहुँच और वित्तीय बोझ में कमी के लिए सीएससी, आशा और पीआरआई प्रतिनिधियों के साथ निकट समन्वय बनाने पर भी जोर दिया गया।

 

कैबिनेट मंत्री ने मेडिकल-लीगल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्टिंग प्रणाली की प्रगति की भी समीक्षा की, जिससे मामलों में पारदर्शिता बढ़ी है और प्रक्रियाओं में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत सभी 22 जिला एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं और 22 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों पर कार्य शुरू हो चुका है। इनमें से 7 प्रयोगशालाएँ पूर्ण हो चुकी हैं और इन्हें जिला अस्पतालों को सौंपा जा रहा है, जहाँ एक ही छत के नीचे मॉलिक्यूलर बायोलॉजी और वायरोलॉजी परीक्षण सहित एकीकृत डायग्नोस्टिक सेवाएँ उपलब्ध होंगी।

 

इस दौरान द्वितीयक देखभाल सुविधाओं में आवश्यक दवाइयों के स्टॉक, बायोमेडिकल उपकरणों की उपलब्धता, स्वच्छता अनुबंध, लिफ्ट रखरखाव, अग्नि-सुरक्षा अनुपालन और पावर बैक-अप प्रणालियों पर चर्चा की गई। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि बुनियादी ढांचे की तैयारियाँ और स्वच्छता सीधे तौर पर जनता के विश्वास को बढ़ाती हैं। खरीद मानकों के पालन और उपयोग प्रमाण-पत्रों की भी समीक्षा की गई।

 

सम्मेलन के दौरान सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी, नवजातों के जीवन-रक्षण, टीकाकरण अभियान और क्षय रोग की पहचान में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। मातृ-शिशु मृत्यु अनुपात में सुधार और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान पर चर्चा की गई तथा सटीक एचएमआईएस रिपोर्टिंग के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए।

 

बैठक में सभी 23 जिलों में पंजाब स्टेमी और स्ट्रोक परियोजनाओं के विस्तार की भी समीक्षा की गई, ताकि टेली-ईसीजी गाइडेड थ्रोम्बोलाइसिस और हब-एंड-स्पोक स्ट्रोक प्रबंधन को सुदृढ़ किया जा सके। आपात स्थितियों से निपटने और परिवारों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए गैर-संचारी रोगों की बेहतर स्क्रीनिंग और कैंसर की प्रारंभिक पहचान के महत्व पर भी जोर दिया गया।

 

स्वास्थ्य मंत्री ने नशा-विरोधी अभियान ‘युद्ध नशों के विरुद्ध 2.0’ पर चर्चा करते हुए बताया कि प्रमुख मेडिकल कॉलेजों के क्लस्टर रिसोर्स सेंटर्स में उपचार और पुनर्वास की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। नशा-मुक्ति की राह पर बढ़ रहे लोगों के लिए शीघ्र ही ‘सूरमा कार्यक्रम’ के तहत ‘एंबेसडर्स ऑफ रिकवरी’ शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से डिजिटल सहायता प्रणालियों, सामुदायिक भागीदारी, सहकर्मी सहायता और संरचित पुनर्वास से नशा-मुक्ति में मदद मिलेगी।

 

जिला प्रमुखों से परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि प्रत्येक मरीज का समय पर इलाज और देखभाल सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सिविल सर्जनों को स्वास्थ्य संस्थानों का आकस्मिक निरीक्षण करने और मरीजों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

 

सम्मेलन में प्रमुख सचिव (स्वास्थ्य) कुमार राहुल, पंजाब विकास आयोग के सदस्य अनुराग कुंडू, पीएचएससी के उपाध्यक्ष विक्की घनौर, एनएचएम के सचिव-सह-प्रबंध निदेशक घनश्याम थोड़ी, पीएचएससी के प्रबंध निदेशक अमित तलवार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की निदेशक डॉ. हितिंदर कौर, स्वास्थ्य सेवाएँ (परिवार कल्याण) की निदेशक डॉ. अदिति सलारिया, निदेशक (ईएसआई) डॉ. अनिल कुमार गोयल, निदेशक (पीएचएससी) डॉ. एस.जे. सिंह सहित विभाग के उप-निदेशक, सहायक निदेशक और वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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