
चंडीगढ़, 18 फ़रवरी 2026
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के वरिष्ठ नेता और विधायक डॉ. इंदरबीर सिंह निज्जर ने ज्ञानी रघबीर सिंह, पूर्व जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब, द्वारा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और शिरोमणि अकाली दल के आंतरिक प्रबंधन को लेकर किए गए सनसनीखेज खुलासों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने कहा कि ज्ञानी रघबीर सिंह जी जैसी सम्मानित शख्सियत, जो संस्थाओं के आंतरिक कामकाज से भली-भांति परिचित हैं, द्वारा लगाए गए ये आरोप सिख कौम के लिए बेहद दुखद और दिल दहला देने वाले हैं। निज्जर ने कहा कि भले ही संगत में इन संस्थाओं के पतन को लेकर पहले से चर्चाएं थीं, लेकिन अब सिखों की सर्वोच्च संस्था के जिम्मेदार पदाधिकारी द्वारा इन सच्चाइयों को सार्वजनिक करना मामले की गंभीरता को कई गुना बढ़ा देता है।
विधायक निज्जर ने भ्रष्टाचार के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु घर की कीमती जमीनों को कौड़ियों के भाव बेचकर अपने चहेतों को अवैध लाभ पहुंचाए जा रहे हैं।
उन्होंने आगे खुलासा किया कि एसजीपीसी के अधीन चल रहे ठेकों में बड़े पैमाने पर घोटाले हो रहे हैं, जहां पहले अपने खास लोगों को ठेके दिए जाते हैं और फिर वे आगे महंगे दामों पर सब-ठेके देकर गुरु की गोलक की लूट कर रहे हैं। इससे भी अधिक शर्मनाक तथ्य यह सामने आया है कि गुरु घर के पवित्र लंगर के लिए तैयार की गई रोटियां तक बेची जा रही हैं, जो सिख संगत की पवित्र श्रद्धा और लंगर की मर्यादा के साथ सीधा खिलवाड़ है।
धार्मिक कार्यों में फैली बुराइयों पर बोलते हुए डॉ. निज्जर ने कहा कि श्री दरबार साहिब में पाठ करवाने के नाम पर श्रद्धालुओं से 5-5 लाख रुपये की रिश्वत मांगे जाने के मामले सामने आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इतना ही नहीं, कर्मचारियों के तबादलों (ट्रांसफरों) में भी बड़े पैमाने पर पैसों का लेन-देन हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सिंह साहिब ज्ञानी सुल्तान सिंह जी को भी एक कर्मचारी ने अमृतसर वापस आने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की बात कही थी, जो यह साबित करता है कि संस्था में ईमानदारी की जगह केवल पैसा और राजनीतिक दबाव हावी हो गया है।
सबसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा करते हुए विधायक निज्जर ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लापता हुए पावन स्वरूपों का प्रश्न उठाया। उन्होंने कहा कि महाराज के 328 पावन स्वरूप, हस्तलिखित स्वरूप और ननकाना साहिब के मोर्चे से संबंधित ऐतिहासिक स्वरूप आज संगत की नजरों से ओझल हैं। उन्होंने सवाल किया कि यह अमूल्य विरासत कहां गई और किसके संरक्षण में इसे गायब किया गया?
अंत में उन्होंने समूची सिख कौम से जोरदार अपील की कि वे एकजुट होकर एसजीपीसी और अकाली दल को एक परिवार के कब्जे से मुक्त करवाएं और इन संस्थाओं में व्यापक सुधार लाएं, ताकि सिख कौम की शान और मर्यादा को पुनः स्थापित किया जा सके।









