
चंडीगढ़, 18 फरवरी:
वन्यजीवों की सुरक्षा और जन-जागरूकता को लेकर भगवंत सिंह मान सरकार के ठोस प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इन प्रयासों के चलते महिंदर चौधरी जूलॉजिकल पार्क, छत्तबीड़ में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस संबंध में जानकारी देते हुए वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारूचक ने बताया कि वर्ष के पहले दो महीनों में ही चिड़ियाघर में 80,508 पर्यटकों का आगमन हुआ है, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता और भागीदारी को दर्शाता है।
पंजाब के वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्री लाल चंद कटारूचक ने आगे कहा,
“मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में हमारी सरकार द्वारा लोगों को वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका जनता की ओर से सकारात्मक और उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है।”
मंत्री ने बताया,
“केवल जनवरी माह में ही छत्तबीड़ चिड़ियाघर में 48,719 पर्यटक पहुंचे, जबकि फरवरी माह में 31,789 पर्यटक शांत और प्राकृतिक वातावरण में पक्षियों एवं जानवरों की विभिन्न प्रजातियों को देखने आए।”
चिड़ियाघर में पक्षियों और जानवरों की सुरक्षा एवं देखभाल के लिए की गई पहलों को रेखांकित करते हुए मंत्री लाल चंद कटारूचक ने कहा,
“वन्यजीवों की देखभाल और संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के तहत छत्तबीड़ चिड़ियाघर में कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं। देश का सबसे बड़ा और सबसे लंबा वॉक-इन एरिया पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बन चुका है। इसके साथ ही पर्यटकों को शैक्षणिक और मनोरंजक अनुभव प्रदान करने के लिए एक अत्याधुनिक डायनासोर पार्क भी स्थापित किया गया है।”
चिड़ियाघर के बुनियादी ढांचे के नवीनीकरण के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा,
“1,200 मीटर लंबे वन्यजीव सफारी क्षेत्र में चारदीवारी को मजबूत किया गया है तथा स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए 260 केवी का सोलर प्लांट स्थापित किया गया है। मांसाहारी जानवरों के विशेष उपचार हेतु लॉयन सफारी में एक क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित की गई है। साथ ही पर्यटकों, विशेष रूप से स्कूली बच्चों के लिए एक ओपन-एयर ज़ू एजुकेशन प्लाज़ा विकसित किया गया है।”
वन्यजीव संरक्षण के एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए मंत्री लाल चंद कटारूचक ने कहा,
“सिंधु नदी डॉल्फिन को पंजाब का राज्य जलीय जीव घोषित किया गया है तथा राज्य की 13 वन्यजीव अभयारण्यों को प्लास्टिक मुक्त घोषित किया गया है। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार द्वारा प्राथमिक विकास के लिए चयनित 100 वेटलैंड्स में पंजाब के पांच वेटलैंड—हरिके, रोपड़, कांझली, केशोपुर और नंगल—को शामिल किया गया है।”









