प्रोजेक्ट ‘रौशनी’ से बच्चों को मिली नई दृष्टि

होशियारपुर, 22 फरवरी :
डिप्टी कमिश्नर आशिका जैन ने बताया कि ज़िले में बच्चों के स्वास्थ्य और बेहतर भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दयानंद मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (डीएमसी), लुधियाना द्वारा संचालित ‘प्रोजेक्ट रौशनी’ तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत फरवरी के पहले सप्ताह विशेष जांच शिविर आयोजित किया गया, जिससे हज़ारों बच्चों को लाभ मिला।
डीएमसी लुधियाना की डॉ. प्रियंका अरोड़ा के अनुसार, इस अभियान के दौरान ज़िले के 15 सरकारी और निजी स्कूलों में स्वास्थ्य जांच की गई और कुल 3,402 बच्चों की आंखों की जांच की गई। सरकारी स्कूलों की रिपोर्ट आरबीएसके टीम के साथ साझा कर दी गई है, जबकि जिन बच्चों को चश्मे की आवश्यकता है, उन्हें राष्ट्रीय अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम (एनपीसीबी) के तहत निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि शिविर के दौरान कुछ बच्चों में दृष्टि दोष पाया गया, जिन्हें मौके पर ही चश्मे दिए गए, जबकि गंभीर समस्याओं वाले बच्चों को आगे उपचार और सर्जरी की सलाह दी गई। इसी क्रम में होशियारपुर ज़िले के दो बच्चों में आंखों के टेढ़ेपन (स्क्विंट) की समस्या पाई गई थी, जिनका डीएमसी अस्पताल लुधियाना में सफल ऑपरेशन किया गया। इनमें एक बच्ची सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल बस्सी कलां की तथा एक बच्चा एस.ए.वी. जैन डे बोर्डिंग स्कूल, होशियारपुर का छात्र है। दोनों सर्जरी सफल रहीं और बच्चों की दृष्टि में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।
डिप्टी कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि यह पूरी चिकित्सीय प्रक्रिया बच्चों और उनके परिवारों के लिए पूरी तरह निःशुल्क रही, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट रौशनी के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शामिल किया जाता है, ताकि प्रारंभिक अवस्था में ही दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान कर समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
आशिका जैन ने इस सराहनीय कार्य के लिए डीएमसी लुधियाना की विशेषज्ञ टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं समाज के कमजोर वर्गों के लिए वरदान सिद्ध होती हैं। उन्होंने विशेष रूप से रेड क्रॉस सोसाइटी के सचिव मंगेश सूद तथा उनकी टीम के योगदान की सराहना की और कहा कि शिविर के आयोजन, बच्चों की पहचान, अभिभावकों से संपर्क और उपचार प्रक्रिया के समन्वय में रेड क्रॉस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
उन्होंने कहा कि ज़िला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, रेड क्रॉस सोसाइटी और डीएमसी लुधियाना के संयुक्त प्रयासों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी बच्चा उपचार के अभाव में अपनी दृष्टि न गंवाए। ऐसे प्रयास न केवल बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव भी मजबूत करते हैं।









