
चंडीगढ़, 26 फ़रवरी:
खनन क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और नियमित खनन व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की दिशा में एक और निर्णायक कदम उठाते हुए पंजाब के खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज पंजाब में क्रशर-ओनर माइनिंग साइट्स (सीआरएमएस) की शुरुआत की। पठानकोट जिले में स्थित इन साइटों के शुभारंभ के अवसर पर कैबिनेट मंत्री ने कहा कि इस पहल से बाजार में रेत और अन्य खनिजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी और राज्य भर में अवैध खनन पर और अधिक प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सकेगी।
इस अवसर पर खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री, क्रशर मालिकों, भूमि मालिकों तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में दो क्रशर-ओनर माइनिंग साइट्स के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। कैबिनेट मंत्री ने बताया कि इन दोनों साइटों के अंतर्गत कुल 4.46 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के माध्यम से विभाग एक सुव्यवस्थित ढांचा लागू कर रहा है, जिसके तहत स्वीकृत खनन योजनाओं और पर्यावरणीय मंजूरी के अंतर्गत पंजीकृत क्रशर यूनिट्स सीधे खनन गतिविधियों में भाग ले सकेंगी।
उन्होंने कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार राज्य के लोगों को किफायती दरों पर रेत और अन्य खनिज उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। क्रशर-ओनर माइनिंग साइट्स और लैंड-ओनर माइनिंग साइट्स के शुरू होने से लघु खनिजों की कानूनी आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे बाजार की कीमतें स्थिर और उचित बनी रहेंगी।
नई खनन नीति के तहत की गई पहलों की जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री ने बताया कि राज्य भर से क्रशर-ओनर माइनिंग साइट्स के लिए कुल 138 आवेदन और लैंड-ओनर माइनिंग साइट्स के लिए 25 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 305.59 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाली 44 साइट्स की जिला सर्वेक्षण रिपोर्टों को मंजूरी दी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि 79.74 हेक्टेयर क्षेत्र वाली 14 साइट्स के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी 44 स्वीकृत साइट्स को 31 मार्च 2026 तक मंजूरी मिल जाएगी, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से इन साइट्स पर कार्य शुरू किया जाएगा।
श्री गोयल ने बताया कि 44 स्वीकृत माइनिंग साइट्स पर 31 मार्च 2026 तक काम शुरू हो जाएगा, जो राज्य में लघु खनिजों की कानूनी आपूर्ति बढ़ाने के लिए सरकार की समयबद्ध कार्य योजना का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि शेष 119 साइट्स पर भी इस वर्ष सभी कानूनी और पर्यावरणीय स्वीकृतियां पूरी होने के बाद चरणबद्ध ढंग से कार्य शुरू किया जाएगा। इससे बाजार में रेत और बजरी की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी, निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ होगी और अवैध खनन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगेगी।
खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि कानूनी खनन आपूर्ति के विस्तार से न केवल सरकारी खजाने के राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि खनन क्षेत्र में अनुशासन और नियमितता भी आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मान सरकार अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपना रही है और इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
इस सुव्यवस्थित ढांचे की विस्तृत जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री ने बताया कि क्रशर-ओनर माइनिंग साइट के तहत पंजीकृत क्रशर मालिक अपनी स्वयं की भूमि, लीज पर ली गई भूमि या वैध पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से प्राप्त भूमि पर स्वीकृत खनन योजना, जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट और पर्यावरणीय मंजूरी के अनुसार खनन कर सकेंगे। इसी प्रकार, लैंड-ओनर माइनिंग साइट्स के तहत भूमि मालिक आवश्यक कानूनी और पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने के बाद अपनी भूमि पर खनन कर सकेंगे।
कैबिनेट मंत्री ने दोहराया कि भविष्य में विभाग कानूनी स्वीकृतियों की प्रक्रिया को और तेज करेगा, पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेगा और सतत खनन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल बुनियादी ढांचे के विकास में सहायक सिद्ध होगी और पंजाब के समग्र आर्थिक विकास को गति प्रदान करेगी।
बैठक के दौरान मुख्य अभियंता (माइनिंग) श्री हरदीप सिंह मैंदीरत्ता, विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा क्रशर प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।









