
चंडीगढ़, 26 फ़रवरी 2026:
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के तहत पंजाब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (पीएसआरएलएम) द्वारा 18 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा। इस अवसर पर पंजाब सरकार द्वारा राज्य भर के हलकों, जिलों और राज्य स्तर पर कुल 14,100 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान शीर्ष 100 महिला उद्यमियों को 25,000 रुपये प्रति उद्यमी की राशि प्रदान की जाएगी। उल्लेखनीय है कि स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की दर 18 प्रतिशत से घटकर 2.16 प्रतिशत रह गई है।
इस संबंध में बड़े स्तर पर आयोजनों की घोषणा करते हुए तथा वर्ष 2022 के बाद प्रदान किए गए वित्तीय एवं संस्थागत लाभों की जानकारी देते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने कहा कि सरकार ने राज्य भर में स्वयं सहायता समूहों का विस्तार किया है, फंडिंग बढ़ाई है और ग्रामीण महिलाओं की स्थिति को सुदृढ़ किया है।
मंत्री ने कहा, “राज्य के प्रत्येक हलके से स्वयं सहायता समूहों की 100 महिला उद्यमियों को पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। कुल 11,700 महिला उद्यमियों को सम्मान मिलेगा। इसी तरह 23 जिलों से 2,300 और प्रत्येक जिले से 100 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया जाएगा। राज्य स्तर पर एक समिति पंजाब की शीर्ष 100 महिला उद्यमियों का चयन करेगी और प्रत्येक को 25,000 रुपये प्रदान किए जाएंगे। इस प्रकार कुल 14,100 महिला उद्यमियों को सम्मानित किया जाएगा।”
पंजाब सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि 2022 से 2026 के बीच 28,734 स्वयं सहायता समूह बनाए गए, जबकि 2011 से 2022 के बीच 29,053 समूह बने थे। इसी अवधि (2022–2026) में 2,90,213 सदस्य जोड़े गए, जबकि 2011–2022 के 11 वर्षों में 2,97,083 सदस्य जुड़े थे।
संस्थागत विस्तार पर उन्होंने कहा कि 2022–2026 के दौरान 2,427 ग्राम संस्थाएं बनाई गईं, जबकि 2011–2022 में 1,806 ग्राम संस्थाएं बनी थीं। इसी तरह, स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड के रूप में 53.03 करोड़ रुपये (2022–2026) जारी किए गए, जबकि 2011–2022 में 28.59 करोड़ रुपये दिए गए थे।
वित्तीय सहायता का विवरण देते हुए मंत्री ने बताया कि कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के रूप में 84.88 करोड़ रुपये (2022–2026) जारी किए गए, जबकि 2011–2022 में 105.72 करोड़ रुपये दिए गए थे। इसके अलावा, स्वयं सहायता समूहों ने 2022–2026 के दौरान 631.76 करोड़ रुपये के ऋण प्राप्त किए, जबकि 2011–2022 में यह राशि 171.13 करोड़ रुपये थी। सरकार ने एसएचजी की एनपीए दर को घटाकर 2.16 प्रतिशत कर दिया है, जो पहले 18 प्रतिशत थी—यह वर्तमान सरकार की उल्लेखनीय उपलब्धि है।
पीएसआरएलएम के उद्देश्यों पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। आज ग्रामीण महिलाएं बचत, ऋण प्रबंधन, छोटे उद्यम, कुटीर उद्योग, कृषि सहायक गतिविधियों और सेवा क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रही हैं। कई महिलाएं अपने गांवों में उद्यमी बनकर रोजगार के अवसर सृजित कर रही हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में 58,000 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 6 लाख ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं। सरकार द्वारा 30,000 रुपये रिवॉल्विंग फंड, 50,000 रुपये कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड तथा 7 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण सुविधा दी जा रही है। अब तक सदस्यों ने लगभग 802.89 करोड़ रुपये के बैंक ऋण लिए हैं, जिनकी एनपीए दर मात्र 2 प्रतिशत है। बाढ़ के दौरान भी सरकार ने 3,000 पशु खरीदने हेतु लगभग 18 करोड़ रुपये की बिना ब्याज सहायता प्रदान की थी।
समग्र सहयोग पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा, “पीएसआरएलएम के माध्यम से महिलाओं को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, बाजार तक पहुंच, बैंकिंग सहायता और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है। यह पहल ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ-साथ उनकी सामाजिक स्थिति में भी सुधार ला रही है। हम सभी से अपील करते हैं कि अधिक से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए, ताकि ‘सशक्त महिला, सशक्त पंजाब’ का सपना साकार हो सके।”









