पंजाबराजनीति

खनन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने विपक्ष के नेता को कड़े हाथों लिया

चंडीगढ़, 16 मार्च:

 

पंजाब के खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज राज्य की खनन आय को 20,000 करोड़ रुपये तक ले जाने संबंधी बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा को कड़े शब्दों में घेरा। यह बयान अरविंद केजरीवाल द्वारा दिए गए बयान के संदर्भ में आया था।

 

करीब 20,000 करोड़ रुपये की संभावित खनन आय के सवाल पर कैबिनेट मंत्री ने तथ्यों के साथ जवाब देते हुए पूछा कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में खनन राजस्व कभी 120 करोड़ रुपये से ऊपर क्यों नहीं गया।

 

उन्होंने कहा कि मौजूदा खनन सुधारों और नीतिगत पहलों के जरिए इस क्षेत्र से राज्य की आय में बड़ा इजाफा संभव है। उन्होंने दोहराया कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार द्वारा पोटाश की खोज और प्रगतिशील खनन सुधारों के प्रयास पंजाब को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय दिला सकते हैं।

 

मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अनुमान राजस्थान से सटे पंजाब के क्षेत्रों—खासतौर पर फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब जिलों में पाए गए पोटाश भंडारों की संभावनाओं पर आधारित है। उन्होंने बताया कि पोटाश एक महत्वपूर्ण खनिज है, जिसका लगभग 96% देश में आयात किया जाता है और पंजाब में इसकी खोज पहले व्यवस्थित रूप से नहीं की गई थी।

 

उन्होंने कहा कि भगवंत सिंह मान सरकार ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों के समक्ष लगातार उठाया है। केंद्रीय खनन मंत्री जी किशन रेड्डी के साथ बैठकों में भी इस विषय को प्रमुखता से रखा गया, जिसके बाद पंजाब में ड्रिलिंग और सर्वेक्षण कार्यों को गति मिली।

 

इन प्रयासों के तहत अब नई ड्रिलिंग और सर्वेक्षण पहल शुरू की गई हैं। फाजिल्का में लगभग 48 किलोमीटर क्षेत्र में भू-वैज्ञानिक खोज कार्यों को करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है और अन्य स्थानों की भी जांच की जा रही है।

 

मंत्री ने बताया कि पोटाश के नमूनों की प्रारंभिक जांच में इसकी अच्छी गुणवत्ता सामने आई है, जिससे भविष्य में खनन संभावनाओं को लेकर राज्य का विश्वास मजबूत हुआ है। हालांकि खनिजों की खोज और नीलामी का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, लेकिन रॉयल्टी का लाभ राज्य को मिलेगा, जिससे पंजाब की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

 

खनन गतिविधियों पर उठ रही चिंताओं के जवाब में उन्होंने कहा कि बाढ़ नियंत्रण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के तहत किए जाने वाले डी-सिल्टिंग कार्यों और अवैध खनन के बीच अक्सर भ्रम पैदा किया जाता है। हाल ही में आई बाढ़ के बाद लगभग 180 स्थानों पर 500 करोड़ रुपये की लागत से सुरक्षा और मजबूती के कार्य किए गए हैं।

 

उन्होंने यह भी बताया कि अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए अब तक 1573 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई हैं और 1655 चालान पेश किए गए हैं। वहीं, लुधियाना-रोपड़ राष्ट्रीय राजमार्ग जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए मिट्टी कम दरों पर उपलब्ध करवाई गई।

 

अंत में उन्होंने कहा कि जहां पिछली सरकारों के दौरान खनन राजस्व 120 करोड़ रुपये से अधिक नहीं गया, वहीं मौजूदा सरकार के 2022 में सत्ता संभालने के समय यह 234 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

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