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एक ‘पिता’ के लिए बड़ी राहत: ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत चार महीने की दिलजोत को 2.77 लाख रुपये का इलाज कवर मिला; सिर्फ तीन महीनों में 6,000 से अधिक नवजात बच्चों का इलाज किया गया।

चंडीगढ़, 8 अप्रैल 2026:

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ की शुरुआत के दौरान कहा था कि “इलाज के बारे में सोचो, बिल के बारे में नहीं। सरकार आपके इलाज का खर्च उठाएगी।” अबोहर में रशप्रीत कौर और भरत कुमार के घर जन्मी चार महीने की बच्ची दिलजोत जैसे परिवारों के लिए ये शब्द बहुत मायने रखते हैं।

दिलजोत को गंभीर संक्रमण और वेंट्रिक्यूलर सेप्टल डिफेक्ट (दिल में छेद) की बीमारी पाई गई, जो जन्म से पहले ही विकसित हो जाती है। उसके माता-पिता उसे इलाज के लिए बठिंडा ले गए, जहां उनका एक ही मकसद था—उसकी जान बचाना। इलाज का खर्च काफी अधिक था, लेकिन ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ उनके लिए वरदान साबित हुई। दिलजोत को विशेष चिकित्सा देखभाल मिली, जिसमें 24 घंटे निगरानी शामिल थी, और परिवार को एक दिन भी पैसों की चिंता नहीं करनी पड़ी।

भरत कुमार, जो अबोहर में एक छोटा सैलून चलाते हैं, ने बताया कि डॉक्टरों ने उन्हें उनकी बेटी के दिल में छेद होने की जानकारी दी थी। बच्ची का इलाज दो अलग-अलग अस्पतालों में हुआ और स्वास्थ्य कार्ड के तहत 2.77 लाख रुपये का पूरा खर्च कवर हो गया।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में यह योजना सुनिश्चित करती है कि किसी भी परिवार को स्वास्थ्य और आर्थिक कठिनाइयों में से किसी एक को चुनना न पड़े। इस योजना के तहत हर मां और नवजात शिशु को सालाना 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है—चाहे सरकारी अस्पताल हो या सूचीबद्ध निजी अस्पताल—और यह सुविधा बच्चे के जन्म के पहले घंटों से ही उपलब्ध होती है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार गांवों में कार्यक्रम चला रही है ताकि परिवार समय पर जांच करवा सकें और इलाज में देरी न हो। पिछले तीन महीनों में ही 6,000 से अधिक नवजात शिशुओं का इलाज इस योजना के तहत किया गया है, जो इसकी बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।

यह योजना जन्म के समय कम वजन, समय से पहले जन्म, संक्रमण और अन्य नवजात जटिलताओं के इलाज में मदद करती है, साथ ही मां की स्वास्थ्य देखभाल और प्रसव के बाद की सेवाओं को भी मजबूत बनाती है।

दिलजोत का मामला अकेला नहीं है। पूरे पंजाब में अब परिवार नवजात बच्चों को शुरुआती दिनों में ही अस्पताल लेकर आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें भरोसा है कि इलाज का खर्च उन्हें नहीं उठाना पड़ेगा।

बठिंडा के अग्रवाल अस्पताल में एक नवजात, जिसे गंभीर पीलिया और सांस लेने में दिक्कत थी, का लगभग 1 लाख रुपये का इलाज पूरी तरह इस योजना के तहत कवर किया गया।

पटियाला के गढ़ाया गांव के मनकीरत सिंह को जन्म के कुछ दिनों बाद पीलिया और सांस की समस्या के लिए इलाज की जरूरत पड़ी। उसके पिता बलविंदर सिंह ने बताया कि “मेरे बेटे का जन्म 25 मार्च को हुआ था और उसे कुछ स्वास्थ्य समस्याएं थीं। हम उसकी सेहत को लेकर चिंतित थे, लेकिन खर्च की चिंता उससे भी ज्यादा थी। हम मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की इस योजना का धन्यवाद करते हैं, जिसके तहत हमारा पूरा खर्च कवर हो गया।”

फरीदकोट के कोटकपूरा की बिमला रानी ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया, जिसे नवजात देखभाल की आवश्यकता थी। परिवार के एक सदस्य के अनुसार, उनका 18 दिन का बच्चा अब इस योजना के तहत सुरक्षित इलाज प्राप्त कर रहा है।

ये उदाहरण इस योजना के प्रति लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाते हैं। योजना लागू होने के बाद पूरे पंजाब में अधिक से अधिक परिवार मां और नवजात को जन्म के पहले 72 घंटों के भीतर ही अस्पताल लेकर आ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य परिणाम बेहतर हो रहे हैं और देरी से होने वाली जटिलताएं कम हो रही हैं।

पंजाब सरकार लोगों को लगातार प्रेरित कर रही है कि वे निर्धारित केंद्रों और जमीनी स्तर के कैंपों के माध्यम से स्वास्थ्य कार्ड के लिए पंजीकरण करवाएं, ताकि वे ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत कैशलेस इलाज का लाभ उठा सकें।

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