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भोले-भाले घर खरीदारों को रियल्टरों द्वारा की गई उल्लंघनों के कारण अब मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा: रीना गुप्ता

चंडीगढ़, 11 अप्रैल:

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने आम नागरिकों की लंबे समय से चली आ रही चिंताओं का समाधान करते हुए एक अहम फैसला लिया है। यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो हाउसिंग, रिहायशी और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में प्रोजेक्ट प्रमोटरों द्वारा की गई पर्यावरणीय उल्लंघनों के कारण सेल डीड और बिजली कनेक्शन पर लगी पाबंदियों से प्रभावित हो रहे थे।

बोर्ड ने माना कि पहले लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उन भोले-भाले घर खरीदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिन्हें इन उल्लंघनों की जानकारी नहीं थी और जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई इन प्रोजेक्ट्स में निवेश की थी। जनता से मिली शिकायतों और मार्च 2026 में गठित एक उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर अब बोर्ड ने संतुलित और जनहितकारी दृष्टिकोण अपनाया है।

9 अप्रैल के आदेश के अनुसार, उल्लंघन करने वाले प्रोजेक्ट्स पर सेल डीड रोकना आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रहा था, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें किफायती आवास की जरूरत है।

संशोधित निर्देशों के तहत अब व्यक्तिगत खरीदारों को सेल डीड रजिस्टर कराने और बिजली कनेक्शन प्राप्त करने की अनुमति दे दी गई है, ताकि उन्हें बुनियादी सुविधाओं और अधिकारों से वंचित न होना पड़े। हालांकि, नियमों का उल्लंघन करने वाले डेवलपर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, जिसमें पर्यावरण कानूनों के तहत मुकदमा चलाना और नई मंजूरियों पर रोक लगाना शामिल है।

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली जैसी सुविधा अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ी एक मूलभूत आवश्यकता है, और इसे न देना आम नागरिकों के लिए अनुचित कठिनाई पैदा करता है।

PPCB की चेयरपर्सन रीना गुप्ता ने कहा, “पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि पर्यावरण कानूनों का पालन लोगों के बुनियादी अधिकारों और सम्मान की कीमत पर न हो। भोले-भाले घर खरीदारों को उन उल्लंघनों की सजा नहीं मिलनी चाहिए, जो उन्होंने नहीं की हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि इस फैसले के जरिए एक संतुलन कायम किया गया है, जिसमें आम नागरिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

यह निर्णय नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो पर्यावरणीय जवाबदेही को मजबूत करते हुए यह सुनिश्चित करता है कि लोगों की बुनियादी जरूरतों और सम्मान से समझौता किए बिना नियमों का पालन कराया जाए।

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