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पी.एस.एफ.सी. द्वारा “पर्यावरण अनुकूल तरीकों से धान की खेती में प्रगति और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन।

चंडीगढ़, 17 अप्रैल: पंजाब राज्य किसान एवं खेत मजदूर आयोग (पी.एस.एफ.सी.) ने होटल शिवालिक व्यू, चंडीगढ़ में “पर्यावरण अनुकूल तरीकों से धान की खेती में प्रगति और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा – पंजाब में धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) की संभावनाओं को खोलना” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें विभिन्न विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया तथा टिकाऊ खेती के भविष्य पर विचार-विमर्श किया।

इस संगोष्ठी का उद्देश्य धान की खेती में उभरती चुनौतियों—विशेषकर भूजल स्तर में गिरावट, बढ़ती लागत और प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों—का समाधान तलाशना तथा पारंपरिक खेती के विकल्प के रूप में धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) की संभावनाओं पर चर्चा करना था।

कार्यक्रम में विशेष अतिथियों के रूप में डॉ. सतबीर सिंह गोसल, वाइस चांसलर, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना; डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल, वाइस चांसलर, गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना; डॉ. वरिंदर कुमार, रिसर्च डायरेक्टर, इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट – साउथ एशिया रिसर्च सेंटर, वाराणसी; डॉ. टी.एन. प्रकाश कमरदी, पूर्व चेयरमैन, कर्नाटक कृषि मूल्य आयोग; डॉ. पुष्पिंदरपाल सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, आईआईटी रोपड़; तथा डॉ. विनय सिंह, प्रतिनिधि, एफएओ संयुक्त राष्ट्र शामिल हुए।

विशेषज्ञों ने टिकाऊ धान उत्पादन, तकनीकी नवाचार और जल तथा जलवायु चुनौतियों के समाधान में डीएसआर की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने डीएसआर अपनाने के लाभों और व्यवहारिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। डॉ. कुलविंदर सिंह गिल ने पराली जलाने के दीर्घकालिक समाधान हेतु धान के जेनेटिक्स में सुधार संबंधी आगामी सहयोगी परियोजना की जानकारी दी।

डॉ. गुरदेव सिंह खुश ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाने के लिए आयोग के प्रयासों की सराहना की।

श्री हरचंद सिंह बरस्ट ने “पंजाब खेतीबाड़ी, 2026” शीर्षक वाली एक पॉकेट डेटा पुस्तक जारी की, जिसे आयोग ने व्यापक कृषि डेटा बैंक स्थापित करने के उद्देश्य से तैयार किया है।

पीएसएफसी के चेयरमैन प्रो. (डॉ.) सुखपाल सिंह ने पंजाब के कृषि परिदृश्य, विशेषकर धान उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर इसके प्रभावों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने मौजूदा फसल पैटर्न की स्थिरता, डीएसआर की भूमिका और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को पर्यावरणीय चुनौतियों के साथ संतुलित करने की आवश्यकता पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए।

संगोष्ठी में डीएसआर अपनाने के विभिन्न पहलुओं पर चार विषयगत पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। पहले तकनीकी सत्र में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के डॉ. मक्कन सिंह भुल्लर की अध्यक्षता में विशेषज्ञों ने पंजाब में डीएसआर की संभावनाओं, भूजल संरक्षण और कृषि स्थिरता पर चर्चा की। साथ ही मूंगफली और कपास जैसी वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि पीआर-126 और पीआर-131 जैसी धान किस्में रोपाई और डीएसआर दोनों के लिए उपयुक्त हैं, जो टिकाऊ खेती की दिशा में व्यवहारिक विकल्प प्रदान करती हैं। कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी, यूएसए की डॉ. शेरॉन एलिजाबेथ बेन्स ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मिट्टी और पानी की दक्षता बढ़ाने में डीएसआर की भूमिका पर विचार रखे।

दूसरे तकनीकी सत्र में बड़े स्तर पर विशेषज्ञों और हितधारकों की भागीदारी रही। इसमें तकनीकी हस्तक्षेप, पर्यावरणीय प्रभाव और डीएसआर लागू करने की व्यवहारिक चुनौतियों पर चर्चा हुई। पैनलिस्टों ने पंजाब में डीएसआर विस्तार के लिए नवाचार, संस्थागत सहयोग और साझा प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

एक अन्य सत्र में सहकारी समितियों की भूमिका पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि डीएसआर को बढ़ावा देने, खरीद एवं विपणन प्रणाली मजबूत करने तथा किसानों की संस्थागत सहायता तक पहुंच बढ़ाने में सहकारी समितियां अहम भूमिका निभा सकती हैं।

समापन सत्र में पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि यह संगोष्ठी केवल चर्चा नहीं, बल्कि वास्तविक बदलाव की दिशा में सार्थक प्रयास है। उन्होंने इसे पंजाब के घटते जल संसाधनों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि राज्य के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

उन्होंने ‘लैब से खेत’ तक तकनीक पहुंचाने, किसानों की आय बढ़ाने, मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग और निर्माण को बढ़ावा देने तथा डीएसआर अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

वक्ताओं ने पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल देते हुए पंजाब कृषि नीति 2023 को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की। साथ ही उभरती कृषि चुनौतियों के समाधान के लिए हरित क्रांति की तर्ज पर केंद्र सरकार से व्यापक नीति ढांचा तैयार करने की अपील की।

पीएसएफसी के प्रशासनिक अधिकारी-कम-सचिव डॉ. रणजोध सिंह बैंस ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया और आयोग की आगामी पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिनमें डीएसआर को बढ़ावा देना और पंजाब कृषि से जुड़े अन्य कार्यक्रम शामिल हैं।

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