
चंडीगढ़, 1 मई—
मजदूर दिवस के अवसर पर भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब विधानसभा ने 13 वर्षों बाद न्यूनतम मजदूरी में 15 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया। इस फैसले का लाभ सरकारी और निजी क्षेत्र के सभी पंजीकृत कामगारों को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने इस बढ़ोतरी को श्रमिक वर्ग के योगदान के प्रति सच्चा सम्मान बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यूनतम मजदूरी की मूल दर (बेस रेट) आखिरी बार 2012 में संशोधित की गई थी। उन्होंने कहा कि भले ही महंगाई भत्ता समय-समय पर बढ़ता रहा, लेकिन मूल वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी। ऐसे में मजदूर दिवस के इस विशेष अवसर पर यह फैसला ऐतिहासिक है।
उन्होंने कहा कि मजदूर समाज, अर्थव्यवस्था और विकास की रीढ़ हैं और हर उपलब्धि उनके अथक परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने वर्ष 1886 में हेमार्केट घटना के दौरान मजदूरों द्वारा दिए गए बलिदानों को भी याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ही मजदूरों के जीवन को बदल सकती है। उन्होंने बताया कि राज्य में शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार किए जा रहे हैं, जिनका परिणाम यह है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अब बड़ी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं, जिनमें हाल ही में कई विद्यार्थियों ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा भी पास की है।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सत्र की शुरुआत सकारात्मक माहौल में हुई, लेकिन विपक्ष ने बिना किसी ठोस मुद्दे के वॉकआउट कर दिया, जो उनकी संकीर्ण सोच को दर्शाता है। इसके विपरीत, राज्य सरकार मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026 के पारित होने के उपलक्ष्य में ‘शुक्राना यात्रा’ निकाली जाएगी। यह यात्रा 6 मई को श्री आनंदपुर साहिब से शुरू होकर 9 मई तक चलेगी और विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धा अर्पित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह कानून श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करेगा और बेअदबी जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान करता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह कदम राज्य में शांति, सद्भाव और भाईचारे को और मजबूत करेगा।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार मजदूरों की भलाई और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाती रहेगी, ताकि वे राज्य और देश की प्रगति में अपना योगदान जारी रख सकें।









