
चंडीगढ़ / होशियारपुर; 4 मई 2026: पंजाब के होशियारपुर जिले के दसूहा क्षेत्र के गांव पनवा की 65 वर्षीय केवल कौर के जीवन में 17 अप्रैल का दिन नई खुशियां लेकर आया। पिछले कई वर्षों से वह घुटनों के असहनीय दर्द से जूझ रही थीं, जिसके कारण उनका जीवन दर्द तक सीमित हो गया था। वह बिना सहारे चल नहीं सकती थीं और हर दिन संघर्ष जैसा लगता था।
आज केवल कौर फिर से अपने पैरों पर खड़े होने की ओर बढ़ रही हैं, वह भी बिना किसी आर्थिक बोझ के—जिसका श्रेय भगवंत सिंह मान सरकार की स्वास्थ्य पहल को जाता है।
‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत उनके घुटनों का ऑपरेशन पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, जालंधर में सफलतापूर्वक किया गया। पहले इस ऑपरेशन पर लगभग 1.5 लाख रुपये का खर्च आता था, जो अब पूरी तरह मुफ्त किया गया।
केवल कौर के पुत्र मनदीप सिंह, जो एक किसान हैं, इन कठिन समय को याद कर भावुक हो जाते हैं। करीब पांच वर्षों तक उनकी मां लगातार दर्द में रहीं। उन्होंने कई डॉक्टरों से सलाह ली और दवाइयां लीं, लेकिन स्थायी राहत नहीं मिली। आखिरकार स्थिति ऐसी हो गई कि बिना सहारे एक कदम चलना भी मुश्किल हो गया।
वह बताते हैं, “जब मेरी माता जी पूरी तरह निर्भर हो गईं, तब सर्जरी ही एकमात्र उम्मीद थी।”
मनदीप ने पहले अखबार में इस योजना के बारे में पढ़ा और हेल्थ कार्ड बनवाया, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। अस्पताल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 17 अप्रैल को डॉ. अनित सचर और उनकी टीम ने करीब दो घंटे में सफलतापूर्वक सर्जरी पूरी की।
अब रिकवरी शुरू हो चुकी है और साथ ही आत्मसम्मान और सुकून की वापसी भी हो रही है। हालांकि टांके अभी लगे हुए हैं और जल्द ही हटा दिए जाएंगे, लेकिन वर्षों पुराना दर्द अब कम होने लगा है।
भावुक होकर केवल कौर कहती हैं, “मुख्यमंत्री भगवंत मान मेरे लिए तीसरे बेटे जैसे हैं। मेरा ऑपरेशन बिना एक भी पैसा खर्च किए हो गया। अब मैं किसी पर बोझ नहीं हूं, जिंदगी अब आसान होगी।”
परिवार के लिए यह सिर्फ एक मेडिकल प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि आत्मसम्मान की वापसी थी। मनदीप बताते हैं कि भले ही उनके बच्चे विदेश में रहते हैं और आर्थिक मदद संभव थी, लेकिन इस योजना ने उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मान दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि केवल कौर के साथ-साथ मोहाली, होशियारपुर और आसपास के गांवों के लगभग पांच अन्य बुजुर्ग मरीजों के भी इसी योजना के तहत घुटनों के ऑपरेशन हुए। शुरुआती जांच में लगभग 2,400 रुपये खर्च हुए, लेकिन पूरा इलाज मुफ्त रहा।
मनदीप के अनुसार, इस योजना के तहत 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
केवल कौर की यह कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन की कहानी नहीं है, बल्कि इस बात का उदाहरण है कि सही समय पर सही मदद मिलने से न केवल स्वास्थ्य सुधरता है, बल्कि उम्मीद, आत्मसम्मान और जीवन जीने की इच्छा भी वापस आती है।








