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पंजाब सरकार ने प्रसूति स्वास्थ्य सेवाओं में लाई क्रांति; हर महीने 20,000 गर्भवती महिलाएं आम आदमी क्लीनिकों से ले रही हैं लाभ

सिर्फ 4 महीनों में 10,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं ने करवाए मुफ्त अल्ट्रासाउंड
माताओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए आम आदमी क्लीनिकों के माध्यम से राज्यव्यापी प्रोटोकॉल-संचालित गर्भावस्था देखभाल की शुरुआत
प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर एंटे-नेटल सेवाओं के विस्तार से प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु दर घटाने का लक्ष्य
आम आदमी क्लीनिकों में गर्भावस्था देखभाल का विस्तार पंजाब में माताओं के स्वास्थ्य के लिए एक परिवर्तनकारी कदम : डॉ. बलबीर सिंह
चंडीगढ़, 4 जनवरी 2026:
आने वाली पीढ़ियों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने मातृत्व स्वास्थ्य देखभाल को सफलतापूर्वक विकेंद्रीकृत किया है। आम आदमी क्लीनिक (एएसी) गर्भवती महिलाओं के लिए एक नई जीवनरेखा के रूप में उभर रहे हैं। एक विशेष प्रोटोकॉल-आधारित गर्भावस्था देखभाल मॉडल शुरू करने के महज चार महीनों के भीतर ही सेवाएं लेने वाली महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और हर महीने लगभग 20,000 गर्भवती महिलाएं इन क्लीनिकों तक पहुंच बना रही हैं।
इस पहल की सफलता साझा करते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत एक विशेष रेफरल प्रणाली के माध्यम से अब तक 10,000 से अधिक महिलाओं को मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। इसके साथ ही लगभग 500 निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों को सूचीबद्ध कर राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि महिलाएं विभिन्न स्कैन—जिनकी सामान्य लागत 800 से 2,000 रुपये के बीच होती है—पूरी तरह मुफ्त में करवा सकें। इस सुविधा के चलते केवल 120 दिनों की अवधि में ही पंजाबी परिवारों को अनुमानित रूप से 1 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 70 प्रतिशत से कम गर्भवती महिलाओं ने अपना पहला एंटे-नेटल चेक-अप करवाया है और लगभग 60 प्रतिशत से भी कम महिलाओं ने सिफारिश के अनुसार चारों चेक-अप पूरे किए हैं। वहीं, राज्य में मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 90 है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। ये आंकड़े पूरे राज्य में एक व्यापक और सुलभ गर्भावस्था देखभाल मॉडल की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
पंजाब में हर वर्ष लगभग 4.3 लाख प्रसव होते हैं, जिससे माताओं और शिशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए समय पर पहचान, नियमित निगरानी और त्वरित रेफरल अत्यंत आवश्यक हो जाता है। पिछले तीन वर्षों में मान सरकार ने 881 आम आदमी क्लीनिक स्थापित किए हैं, जो पंजाब की प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ बन चुके हैं। इन क्लीनिकों में अब तक 4.6 करोड़ से अधिक ओपीडी विजिट हो चुकी हैं और प्रतिदिन लगभग 70,000 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इसी मजबूत बुनियादी ढांचे का लाभ उठाते हुए सरकार ने लगभग चार महीने पहले आम आदमी क्लीनिकों के माध्यम से एक विस्तृत, प्रोटोकॉल-संचालित गर्भावस्था देखभाल मॉडल शुरू किया।
इस सुधार के तहत अब सभी आवश्यक एंटे-नेटल जांचें आम आदमी क्लीनिकों में उपलब्ध हैं। इनमें एचआईवी और सिफिलिस की स्क्रीनिंग, सभी प्रकार के रक्त परीक्षण, शुगर, थायरॉयड, हेपेटाइटिस, भ्रूण की हृदय गति, कोलेस्ट्रॉल और हीमोग्लोबिन आकलन जैसे महत्वपूर्ण परीक्षण शामिल हैं। यदि अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता होती है, तो एएसी डॉक्टर द्वारा रेफरल स्लिप जारी की जाती है, जिसके माध्यम से गर्भवती महिलाएं मुफ्त अल्ट्रासाउंड सेवाएं प्राप्त कर सकती हैं।
एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हर महीने लगभग 5,000 महिलाओं को उच्च-जोखिम गर्भावस्था के रूप में चिन्हित किया जा रहा है, ताकि निरंतर निगरानी, केंद्रित सहायता और विशेषज्ञ देखभाल के लिए समय रहते उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जा सके।
इस सुधार से मरीजों के अनुभव में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। अब महिलाएं गर्भावस्था से जुड़े अधिकांश परीक्षण अपने घर के नजदीक ही करवा सकती हैं, जिससे उन्हें बड़े अस्पतालों में लंबी कतारों और परेशानियों से बचाव मिलता है। कुछ ही मिनटों में डॉक्टर की सलाह और बिना किसी आर्थिक बोझ के अल्ट्रासाउंड जैसी सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। गर्भावस्था की पहली जांच से लेकर प्रसव के बाद के फॉलो-अप तक, यह पहल तकनीक, मानकीकृत क्लीनिकल प्रोटोकॉल, रेफरल सिस्टम और सामुदायिक स्तर की सहायता को एकीकृत कर संपूर्ण गर्भावस्था देखभाल को सशक्त बनाती है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इस उपलब्धि पर कहा कि यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा,
“मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के दूरदर्शी नेतृत्व में पंजाब एक ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण कर रहा है, जो यह सुनिश्चित करती है कि हर मां को घर के नजदीक गुणवत्तापूर्ण देखभाल मिले। सालाना 4.3 लाख गर्भावस्थाओं के साथ, आम आदमी क्लीनिकों में गर्भावस्था देखभाल सेवाओं का विस्तार एक परिवर्तनकारी कदम है और यह भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक नया मानदंड स्थापित कर रहा है।”
सरकार का मानना है कि यह पहल हाल के वर्षों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में पंजाब के सबसे महत्वपूर्ण निवेशों में से एक है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भौगोलिक स्थिति, आय या जागरूकता की कमी के कारण कोई भी महिला इन लाभों से वंचित न रहे। साथ ही, राज्य भर में माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य परिणामों में निरंतर सुधार किया जा रहा है।

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