
फरीदकोट, 9 जनवरी 2026:
पंजाब सरकार द्वारा नशों के खिलाफ चलाई जा रही “युद्ध नशे के विरुद्ध” मुहिम के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा एम्स मोहाली के सहयोग से, जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) मैडम नीलम रानी के नेतृत्व में फरीदकोट जिले में स्कूल प्रिंसिपलों के लिए क्षमता-वर्धन हेतु तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन स्थानीय डायट (DIET) में किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में फरीदकोट जिले के विभिन्न सरकारी और निजी स्कूलों के 92 प्रिंसिपलों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्कूल नेतृत्व को विद्यार्थियों में नशों और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं के प्रारंभिक लक्षणों की समय रहते पहचान करने तथा स्कूलों में सहायक, सुरक्षित और भेदभाव-रहित वातावरण तैयार करने के लिए सक्षम बनाना है।
इस अवसर पर श्री दुर्गेश ओझा (सीनियर प्रोग्राम एसोसिएट) और हरमनप्रीत कौर (काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट) ने बताया कि अध्ययनों के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी लगभग आधी समस्याएं 14 वर्ष की आयु से पहले ही शुरू हो जाती हैं। ऐसे में स्कूल बच्चों को नशों से बचाने और उनकी मानसिक सेहत को सुदृढ़ बनाने में पहली और सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रिंसिपलों को विद्यार्थियों के व्यवहार में बढ़ते तनाव, एकांतवाद और अन्य असामान्य परिवर्तनों की पहचान करने के तरीके समझाए गए, ताकि समय रहते हस्तक्षेप कर उन्हें उचित सहायता और मार्गदर्शन दिया जा सके।
जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी) मैडम नीलम रानी ने कहा कि इस प्रकार की प्रशिक्षण गतिविधियों से फरीदकोट जिले के स्कूल नशों के खिलाफ एक मजबूत पहली रक्षा पंक्ति बनेंगे और विद्यार्थियों को नशा-मुक्त, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इस अवसर पर प्रिंसिपल डायट भूपिंदर सिंह बराड़ ने भी अपने निजी अनुभव साझा किए।
इस मौके पर प्रिंसिपल पन्ना लाल, प्रिंसिपल दीपक सिंह, श्री जसबीर जस्सी (जिला नोडल अधिकारी—युद्ध नशों के विरुद्ध), सुरिंदरपाल सिंह सोनी (पंजाबी मास्टर, चहल), हरमिंदर सिंह सोढ़ी (पंजाबी मास्टर, भोलूवाला) उपस्थित थे।






