
बठिंडा, 11 जनवरी:
युवाओं को करियर बनाने के लिए तैयार करने पर पंजाब सरकार द्वारा और अधिक ध्यान केंद्रित करते हुए, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने रविवार को बठिंडा की जिला लाइब्रेरी में मिशन प्रगति के तहत दाखिल उम्मीदवारों और विद्यार्थियों से संवाद किया। इस पहल के तहत नौकरी तलाशने वालों को नौकरी देने वाले बनाने के व्यापक प्रयासों के हिस्से के रूप में एसएसबी, पुलिस और सशस्त्र बलों सहित अन्य भर्ती परीक्षाओं के लिए ग्रामीण और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मुफ्त शैक्षणिक एवं शारीरिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
बठिंडा की जिला लाइब्रेरी में मिशन प्रगति के अंतर्गत विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कड़ाके की ठंड के बावजूद उपस्थित लोगों का स्वागत किया और इस कार्यक्रम को पंजाब के बच्चों के लिए स्वर्णिम भविष्य की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने जिला लाइब्रेरी में मिशन प्रगति के तहत यह कोचिंग कार्यक्रम शुरू किया है, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग दी जा रही है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के उन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को सुविधा प्रदान करना है, जिनकी गुणवत्तापूर्ण और किफायती कोचिंग तक पहुंच नहीं है।”
इस पहल के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले बैच में 40 विद्यार्थियों को दाखिला दिया गया है। उन्होंने आगे कहा, “शैक्षणिक कोचिंग के साथ-साथ विद्यार्थियों को शारीरिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे पूरी तरह स्वस्थ रहें। यह शारीरिक प्रशिक्षण पंजाब पुलिस और सी-पाइट के अनुभवी प्रशिक्षक-ट्रेनरों द्वारा सी-पाइट मैदान में दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को एसएसबी, पंजाब पुलिस, सीपीओ, सशस्त्र सेनाओं तथा अन्य केंद्रीय और राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं के लिए तैयार किया जाएगा।”
प्रतिस्पर्धी माहौल में उम्मीदवारों के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आवश्यक अध्ययन सामग्री और महंगी किताबें अक्सर विद्यार्थियों की पहुंच से बाहर होती हैं। उन्होंने कहा, “विद्यार्थियों को लाइब्रेरी के सदस्य के रूप में चुना जाएगा और आवश्यक किताबें मुफ्त प्रदान की जाएंगी। यह कार्यक्रम मौजूदा बुनियादी ढांचे और संसाधनों का उपयोग करके शुरू किया गया है, जिससे महत्वपूर्ण वित्तीय बचत होती है।”
इस ढांचे का वर्णन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम शिक्षक-मार्गदर्शक मॉडल का अनुसरण करता है, जिसमें फैकल्टी सदस्य स्वयं उम्मीदवार होते हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह पहल ‘युवाओं द्वारा युवाओं की मदद’ के मॉडल के रूप में उभरी है और इसे शिक्षाविदों, विश्वविद्यालयों, पुलिस, खिलाड़ियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों तथा समाज के हर वर्ग का समर्थन प्राप्त है। इस सामूहिक भागीदारी ने कार्यक्रम को एक समुदाय-संचालित और सहयोगी मॉडल में बदल दिया है।”
मिशन प्रगति के मार्गदर्शक दर्शन को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ‘कोई भी पीछे न रहे’ के सिद्धांत पर आधारित है और युवा सशक्तिकरण, समान शैक्षिक अवसरों तथा सरकारी सेवाओं में बठिंडा के विद्यार्थियों की प्रतिनिधित्व बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने उपस्थित लोगों का समर्थन के लिए धन्यवाद करते हुए विश्वास जताया कि इस कार्यक्रम से विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा और यह पंजाब के सर्वांगीण विकास तथा इसके लोगों की खुशहाली के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
राज्य सरकार के व्यापक दृष्टिकोण पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को नौकरी खोजने वालों के बजाय नौकरी देने वाले बनाकर उनकी किस्मत बदलने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “पंजाब शिक्षा क्रांति के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है और यह क्रांति विद्यार्थियों को भविष्य की प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार कर तथा उन्हें जीवन में उत्कृष्टता प्राप्त करने के योग्य बनाकर परिणाम दे रही है। युवाओं को रोजगार प्रदान करने के लिए बेमिसाल कदम उठाए गए हैं, वहीं उनकी असीम ऊर्जा को सही दिशा में लगाने के लिए समानांतर प्रयास भी किए जा रहे हैं।”
उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जिस प्रकार एक रनवे विमान को सुचारु रूप से उड़ान भरने में सक्षम बनाता है, उसी तरह युवाओं के सपनों को साकार करने के लिए राज्य सरकार अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। अतीत को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निराशाजनक है कि एक समय गलत नीतियों ने गरीब बच्चों को उनके शिक्षा के अधिकार से वंचित रखा था, लेकिन अब यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ प्रयास किए जा रहे हैं कि पंजाब के बच्चे अपने सपनों को हकीकत में बदल सकें और जीवन में नई ऊंचाइयों को छू सकें।






