
चंडीगढ़/काठगढ़ (एस.बी.एस. नगर), 19 मार्च:
पंजाब के जल संसाधन और भूमि एवं जल संरक्षण मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज कहा कि भगवंत मान की अगुवाई वाली सरकार हर क्षेत्र में अपने वादे निभा रही है और सभी गारंटियां बिना किसी भेदभाव के पूरी की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उपेक्षित रहे कंडी क्षेत्र में मान सरकार ने सिंचाई के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है और अर्ध-पहाड़ी इलाके को खेती योग्य अवसरों में बदल दिया है।
मान सरकार ने 214 करोड़ रुपये की लागत से तैयार काठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना के माध्यम से पहली बार नहरी पानी को ऊंचे इलाकों तक पहुंचाया है। उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार की किसान हितैषी नीतियों पर जोर देते हुए कहा कि इस परियोजना से पानी का बेहतर उपयोग होगा, बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचा निवेश होगा और किसानों को राहत मिलने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
इस ऐतिहासिक कदम के तहत मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने आज 214 करोड़ रुपये की लागत से तैयार काठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना का उद्घाटन किया। इस योजना से पहली बार नहरी पानी को ऊंचे क्षेत्रों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया गया है, जिससे कंडी इलाके की सूखी और बारिश पर निर्भर जमीन को सिंचाई सुविधाएं मिलेंगी।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना से लगभग 33 गांवों की 11,500 एकड़ जमीन को सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में इजाफा होगा। यह पहल क्षेत्र की कृषि तस्वीर बदलने में मील का पत्थर साबित होगी और किसानों को बेहतर फसल उगाने तथा जमीन की कीमत बढ़ाने में मदद करेगी।
उद्घाटन के बाद सभा को संबोधित करते हुए बरिंदर कुमार गोयल ने कहा, “काठगढ़ लिफ्ट सिंचाई योजना कंडी नहर सिस्टम और बिस्त-दोआब प्रणाली के जरिए ऊंचाई के कारण सिंचाई से वंचित क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराने का एक ऐतिहासिक प्रयास है।” उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र को बड़ा लाभ होगा और भूजल पर दबाव भी कम होगा।
उन्होंने जानकारी दी कि इस परियोजना को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। 67 करोड़ रुपये की लागत वाला पहला चरण फरवरी 2026 में पूरा हो चुका है, जिससे 13 गांवों की 4,000 एकड़ भूमि को कवर किया गया है। 107 करोड़ रुपये की लागत वाला दूसरा चरण सितंबर 2026 तक पूरा होने की संभावना है, जिसमें 14 गांवों की 5,500 एकड़ भूमि शामिल होगी, जबकि 40 करोड़ रुपये की लागत वाला तीसरा चरण 6 गांवों की 2,000 एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करेगा। बिजली भार कम करने के लिए 650 किलोवाट का सोलर प्लांट भी लगाया गया है।
तकनीकी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना को बिस्त दोआब नहर से जोड़ा गया है, जिसकी डिस्चार्ज क्षमता 67 क्यूसेक है। इसके तहत पंपों के माध्यम से पानी को ऊपर उठाकर पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए ऊंचे और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंचाया जाएगा। पंप हाउस के लिए विभाग की मौजूदा जमीन का ही उपयोग किया गया है।
परियोजना के महत्व पर उन्होंने कहा कि भूजल स्तर में गिरावट और ट्यूबवेल बंद होने के कारण कंडी क्षेत्र के किसान बारिश पर निर्भर थे, जिससे फसल विविधता और उत्पादकता सीमित थी। इस परियोजना के लिए आधुनिक सैटेलाइट और ड्रोन सर्वे किए गए तथा आईआईटी रुड़की और आईआईटी रोपड़ में तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना से पहले बलाचौर क्षेत्र के 72 गांवों की 28,205 एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा मिलती थी, जो अब बढ़कर 105 गांवों की 39,705 एकड़ तक पहुंच जाएगी। खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए लगभग 94,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई हैं।
मंत्री ने कहा कि राज्य में सिंचाई ढांचे को मजबूत करने के लिए अब तक 6700 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। पहले केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग होता था, जो अब बढ़कर 78 प्रतिशत हो गया है। इससे भूजल स्तर में सुधार, बिजली खपत में कमी और मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि हुई है।
कंडी नहर के बारे में उन्होंने बताया कि यह नहर तलवाड़ा से बलाचौर तक जाती है, जिसकी कुल लंबाई 129.035 किलोमीटर और डिस्चार्ज क्षमता 463 क्यूसेक है। पहले पानी टेल एंड तक नहीं पहुंचता था, लेकिन अब सरकार ने इसे सुनिश्चित किया है। 1500 किलोमीटर पुरानी पाइपलाइन को बहाल किया गया, 300 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाई गई और 120 किलोमीटर नहरों की मरम्मत की गई।
लोक-कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा और घरों को 600 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है। सभी गारंटियां बिना किसी भेदभाव के पूरी की जा रही हैं।
इस मौके पर बंगा से विधायक डॉ. सुखविंदर सुक्खी, बलाचौर से विधायक संतोष कटारिया, डिप्टी कमिश्नर गुलप्रीत सिंह औलख, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर बलबीर राज सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।









