
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 10 अप्रैल:
लोगों के विश्वास और राजनीतिक आचरण में स्पष्ट अंतर को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल, जिसे पहले ही जनता की अदालत में नकार दिया गया है, अब परमात्मा की अदालत में भी बेनकाब हो चुका है। उन्होंने सुखबीर सिंह बादल के विरोधाभासी बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब में माफी मांगते समय उन्होंने कुछ और कहा और बाद में अपने बयानों से मुकर गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के लोग अच्छी तरह समझते हैं कि ये कार्रवाइयां श्री अकाल तख्त साहिब की पवित्रता को कमजोर करने की कोशिश हैं।
धार्मिक अधिकार और बेअदबी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सर्वोच्च है। उन्होंने बेअदबी की किसी भी घटना के खिलाफ सख्त से सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक विधायी कार्रवाई करने का ऐलान किया।
एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख समुदाय की सर्वोच्च संस्था है। उन्होंने कहा, “हर पंजाबी, खासकर सिख, श्री अकाल तख्त साहिब के आगे सिर झुकाता है और इसके हर आदेश को अंतिम मानता है।” उन्होंने आगे कहा कि यदि सुखबीर सिंह बादल से कोई गलती हुई है तो उन्हें स्थापित धार्मिक परंपराओं के अनुसार उसे स्वीकार करना चाहिए, न कि संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचानी चाहिए।
बेअदबी विरोधी कानून के बारे में मुख्यमंत्री ने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मान से जुड़े कानून (2008) में संशोधन के लिए विधानसभा का विशेष सत्र वैसाखी के पवित्र अवसर पर बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि पवित्र ग्रंथ की बेअदबी की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित संशोधनों को अंतिम रूप देने से पहले संत समाज और कानूनी विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा किया जा रहा है।









