
चंडीगढ़, 10 अप्रैल:
पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बताया कि पंजाब ने पर्यावरण श्रेणी में स्कॉच सिल्वर अवॉर्ड 2025 हासिल किया है, जिससे फसली अवशेष प्रबंधन के क्षेत्र में राज्य की रणनीति को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार के निरंतर प्रयासों को दिया।
पंजाब भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मंत्री ने बताया कि राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में 94 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा वर्ष 2020-21 में 83,002 से घटकर 2025-26 में मात्र 5,114 रह गया है।
मंत्री ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और किसानों की सराहना करते हुए कहा कि यह पुरस्कार किसानों की दृढ़ता और प्रशासन की दूरदर्शिता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मशीनरी पर सब्सिडी, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना और रिकॉर्ड फंडिंग जैसी रणनीतियों ने पराली प्रबंधन को नया रूप दिया है।
उन्होंने बताया कि किसानों, एफपीओ और पंचायतों को फसली अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों पर 50-80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। इस वर्ष 25,000 मशीनों की खरीद के लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि 2025-26 में लगभग 13,000 मशीनें खरीदी जा चुकी हैं और 427 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की जा चुकी है।
मंत्री ने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं में आई कमी से मिट्टी और वायु की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब का मॉडल यह दर्शाता है कि मजबूत इच्छाशक्ति, वित्तीय सहायता और सामुदायिक भागीदारी से पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान किया जा सकता है।









