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पंजाब टैक्स विभाग ने फर्जी बिलिंग के बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया; लुधियाना स्थित फर्म का डायरेक्टर गिरफ्तार: हरपाल सिंह चीमा

चंडीगढ़, 8 मई – मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की आर्थिक अपराधों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति की पुष्टि करते हुए वित्त, आबकारी एवं कर मंत्री Harpal Singh Cheema ने आज यहां स्टेट इंटेलिजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट (SIPU) द्वारा हासिल की गई एक बड़ी सफलता की घोषणा की।

कार्रवाई का विवरण साझा करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा, “आज कर विभाग ने एक बेहद संगठित फर्जी बिलिंग नेटवर्क का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ करते हुए मेसर्स एपीआई प्लास्टिक रिसाइक्लर्स प्राइवेट लिमिटेड, लुधियाना के डायरेक्टर और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता परमजीत सिंह को 85.4 करोड़ रुपये के फर्जी लेन-देन के आधार पर गलत तरीके से फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने और 15.56 करोड़ रुपये के बड़े जीएसटी घोटाले में गिरफ्तार किया है।”

जांच के बारे में विस्तार से बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “आरोपी फर्म योजनाबद्ध और संगठित टैक्स चोरी में शामिल थी। उन्होंने बिना वास्तविक माल प्राप्त किए, कई राज्यों में मौजूद गैर-मौजूद और धोखाधड़ी वाली फर्मों द्वारा जारी फर्जी चालानों (बिलों) के आधार पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया।”

आगे जानकारी देते हुए आबकारी एवं कर मंत्री ने कहा, “हमारी खुफिया टीमों ने यह भी पाया कि लेन-देन में शामिल कई सप्लायर फर्मों को संबंधित जीएसटी अधिकारियों द्वारा पहले ही स्वतः रद्द, निलंबित या गैर-कार्यशील घोषित किया जा चुका था। अब तक सामने आई कुल धोखाधड़ी 15.56 करोड़ रुपये की है, और जांच जारी रहने के कारण यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।”

धोखाधड़ी के जटिल नेटवर्क का खुलासा करते हुए मंत्री ने कहा, “मैं विभाग द्वारा ई-वे बिलों और फास्टैग टोल डेटा के विस्तृत विश्लेषण की सराहना करता हूं। इस विश्लेषण से यह निर्णायक रूप से साबित हुआ कि परिवहन दस्तावेजों में दर्शाए गए वाहन घोषित माल परिवहन से मेल नहीं खाते थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वास्तव में कोई ढुलाई नहीं हुई थी। हमारी जांच में ऐसे 407 बेहद संदिग्ध वाहन मूवमेंट सामने आए हैं, जिनमें 2.65 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी आईटीसी शामिल है।”

दस्तावेजों की जालसाजी की गंभीरता को उजागर करते हुए मंत्री चीमा ने कहा, “हमारी जांच में धोखाधड़ी वाले डेबिट नोट्स के जरिए लगभग 5.79 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फर्जी आईटीसी तैयार करने के नए तरीके का भी खुलासा हुआ है। इन डेबिट नोट्स में भारी अनियमितताएं थीं, जिनमें टैक्स योग्य मूल्य और टैक्स राशि को बराबर दिखाया गया था। जीएसटी कानून के तहत यह असंभव है और यह स्पष्ट रूप से फर्जी आईटीसी बनाने के लिए रिकॉर्ड में हेराफेरी को साबित करता है। इसके अलावा, पीजीएसटी/सीजीएसटी एक्ट की धारा 67 के तहत की गई तलाशी के दौरान टैक्सदाता के ठिकाने से विभिन्न ट्रांसपोर्टरों की खाली गुड्स रसीद बुकें बरामद हुईं, जो फर्जी परिवहन रिकॉर्ड तैयार करने की ओर इशारा करती हैं।”

टैक्स चोरों को सख्त संदेश देते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “जांच के दौरान जुटाए गए ठोस सबूतों के आधार पर आरोपी को आज 8 मई 2026 को पंजाब गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट, 2017 की धाराओं 69 और 132(1)(c) के तहत गिरफ्तार किया गया है। चूंकि टैक्स चोरी की राशि 5 करोड़ रुपये से कहीं अधिक है, इसलिए यह अपराध गंभीर और गैर-जमानती है, जिसमें जुर्माने के साथ पांच साल तक की सजा हो सकती है। मैं फर्जी बिलिंग रैकेट और जीएसटी धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए राज्य के कर विभाग की प्रतिबद्धता दोहराता हूं। राज्य के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले फर्जी आईटीसी बनाने और उसका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।”

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