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मुख्यमंत्री Bhagwant Singh Mann सरकार की ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत नकद-रहित इलाज से पंजाब में 5000 से अधिक दिल के मरीजों की जान बचाई गई।

चंडीगढ़, 08 मई: दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में हर सेकंड बेहद कीमती होता है। कुछ मिनटों की देरी जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क तय कर सकती है। पंजाब में अब समय के खिलाफ यह जंग लगातार जीती जा रही है, क्योंकि Bhagwant Singh Mann सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत तेज और कैशलेस एंजियोप्लास्टी सेवाएं मरीजों को जरूरत पड़ने पर समय रहते आपातकालीन इलाज उपलब्ध करवा रही हैं।

हार्ट अटैक केवल एक चिकित्सीय आपात स्थिति ही नहीं होता, बल्कि यह परिवारों पर आर्थिक बोझ भी डालता है। पहले इलाज के लिए पैसे जुटाने, जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करने और अस्पताल से मंजूरी लेने में परिवारों का बहुमूल्य समय बर्बाद हो जाता था। अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है। स्वास्थ्य कार्ड प्रणाली के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की जांच और आपातकालीन एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया इलाज से पहले भुगतान में होने वाली देरी के बिना तेजी से पूरी की जा रही है। यह बदलाव खासकर ‘गोल्डन ऑवर’ — यानी हार्ट अटैक के बाद के पहले 60 मिनट — के दौरान अनमोल जिंदगियां बचाने में निर्णायक साबित हो रहा है।

वैश्विक स्तर पर हृदय संबंधी बीमारियां मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बनी हुई हैं। World Health Organization के अनुसार, हर साल लगभग 17.9 मिलियन लोगों की मौत हृदय रोगों के कारण होती है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की होती है, जहां इलाज में हुई देरी जानलेवा साबित होती है। पंजाब की स्वास्थ्य प्रणाली अब इस चुनौती से सक्रिय रूप से निपट रही है।

राज्यभर के डॉक्टरों के अनुसार, दिल की बीमारियों के मामले अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। आरामदायक जीवनशैली, तनाव, अस्वस्थ खानपान और मधुमेह के बढ़ते मामले इसके प्रमुख कारण हैं। हालांकि इसके साथ ही हृदय संबंधी आपातकालीन उपचार तक पहुंच भी पहले की तुलना में बेहतर हुई है।

स्टेट हेल्थ एजेंसी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में स्वास्थ्य योजना के तहत कुल 5,054 हृदय संबंधी सर्जरी की गई हैं। इनमें 5,000 परक्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (PTCA) प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिनमें डायग्नोस्टिक एंजियोग्राम भी शामिल हैं, जबकि 54 मामलों में पेरिफेरल एंजियोप्लास्टी की गई।

इन उपचारों की कुल लागत लगभग 49.6 करोड़ रुपये रही, जिसमें पीटीसीए प्रक्रियाएं संख्या और कुल खर्च दोनों मामलों में सबसे अधिक रहीं।

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री Balbir Singh ने कहा कि इस योजना का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, “अब अधिक मरीज उन परिस्थितियों से भी बच रहे हैं, जिन्हें पहले लगभग जानलेवा माना जाता था। ऐसे नाजुक समय में स्वास्थ्य कार्ड प्रणाली के कारण उपचार की तेजी ही राज्य की जीवनरक्षक बन रही है।”

अस्पतालों के कार्डियोलॉजी विभागों को तेजी से नई जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है। आपातकालीन प्रोटोकॉल को इस तरह सुव्यवस्थित किया जा रहा है कि हार्ट अटैक के संभावित मरीजों की तुरंत जांच हो सके और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में फंसे बिना उन्हें जरूरी इलाज मिल सके।

Government Medical College and Rajindra Hospital के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ शर्मा ने कहा, “स्वास्थ्य कार्ड लोगों को समय पर इलाज दिलाने में मदद कर रहा है। इलाज के खर्च को लेकर जो हिचक पहले होती थी, वह अब काफी हद तक कम हो गई है। पहले कई परिवार इलाज की लागत को लेकर असमंजस में रहते थे, जिसके कारण प्रक्रिया के लिए मंजूरी देने में देरी होती थी।” उन्होंने आगे कहा कि कैशलेस सुविधा उपलब्ध होने से यह रुकावट लगभग खत्म हो चुकी है।

यह बदलाव जिलों में भी साफ दिखाई दे रहा है। पहले मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर किए जाने के कारण खतरनाक देरी का सामना करना पड़ता था। अब योजना के तहत अधिक अस्पतालों के सूचीबद्ध होने और बेहतर सुविधाओं से लैस होने के कारण कई केंद्र लंबी दूरी तक रेफर किए बिना ही एंजियोप्लास्टी शुरू करने में सक्षम हो गए हैं।

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