
चंडीगढ़, 15 जनवरी:
मोहाली वन मंडल द्वारा सिसवां–मिर्ज़ापुर वन क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और इको-टूरिज़्म को बढ़ावा देने के लिए की जा रही पहलों को लोगों से अत्यंत उत्साहजनक समर्थन मिल रहा है।
सिसवां से मिर्ज़ापुर नेचर ट्रैक, जो लगभग 5 किलोमीटर लंबा है और जिसे पूरा करने में लगभग 1.5 घंटे लगते हैं, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरे-भरे वन दृश्य, मनमोहक नज़ारों और वॉच टावरों के कारण लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है।
सिसवां डैम पर नौकायन (बोटिंग) की सुविधा, सुव्यवस्थित कैंटीन सेवाएं और तीन इको-हट्स पर्यटकों को शानदार अनुभव प्रदान कर रही हैं। ये सभी सुविधाएं लोगों में काफी लोकप्रिय हो रही हैं।
इसके अलावा, मंडल द्वारा अन्य नेचर ट्रेल और ट्रैकिंग रूट भी विकसित किए जा रहे हैं, जिन्हें शीघ्र ही आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
25 दिसंबर को सिसवां डैम में एक सफल नेचर अवेयरनेस कैंप का आयोजन किया गया, जिसमें पहले साइक्लिंग इवेंट और उसके बाद ट्रैकिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विशेष रूप से चंडीगढ़ के निवासियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इसके साथ ही, स्कूली बच्चों के लिए नियमित शैक्षणिक भ्रमण भी सिसवां नेचर अवेयरनेस कैंप में आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि नई पीढ़ी में पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित की जा सके।
मोहाली वन मंडल द्वारा प्रकृति संरक्षण, जिम्मेदार इको-टूरिज़्म, पर्यावरण शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, वनों पर निर्भर गांवों के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। सामुदायिक विकास के तहत सिसवां, गोचर और नाडा गांवों के स्वयं सहायता समूहों को अचार निर्माण, ब्यूटी पार्लर, कपड़े के बैग बनाना, सिलाई (टेलरिंग) आदि जैसे कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें। सिसवां गांव की वन समिति द्वारा सामुदायिक सेवा की पहल करते हुए हाल ही में बर्तन भी वितरित किए गए हैं।









