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शुगरकेन हार्वेस्टर से कटाई के लिए चौड़ी दूरी विधि से गन्ने की बुवाई करने की आवश्यकता: केन कमिश्नर

 

लुधियाना : 16 जनवरी 2026 ( )

गन्ने की चौड़ी दूरी पर बुवाई करने से पौधों को अधिक हवा और सूर्य का प्रकाश मिलता है, जिससे गन्ने की मोटाई और लंबाई में वृद्धि होती है। इसके परिणामस्वरूप प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ता है और किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।

जिला लुधियाना के गांव मल्ल माजरा में गन्ने की फसल का निरीक्षण करते हुए पंजाब के केन कमिश्नर डॉ. अमरीक सिंह ने बताया कि मजदूरों की कमी के कारण गन्ना कटाई मशीनों की मांग बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पंजाब में लगभग 30 मशीनें गन्ने की कटाई कर रही हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि पंजाब सरकार द्वारा गन्ना उत्पादकों की मजदूरों की कमी की समस्या को ध्यान में रखते हुए गन्ने की खेती के मशीनीकरण के लिए 4 दिसंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे, जिसके तहत करीब 60 गन्ना उत्पादकों ने शुगरकेन हार्वेस्टर मशीन सब्सिडी पर लेने के लिए आवेदन किए हैं।

डॉ. अमरीक सिंह ने बताया कि वर्तमान में आमतौर पर गन्ने की खेती ढाई से तीन फीट की दूरी पर कतारों में की जाती है, जो मशीन से कटाई के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि ढाई फीट की दूरी पर बोई गई गन्ने की फसल की मशीन से कटाई करने पर गन्ने को नुकसान होता है, जिससे गन्ना उत्पादकों और चीनी मिल प्रबंधन को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। जबकि चौड़ी दूरी विधि से बोई गई गन्ने की फसल की मशीन से कटाई करने पर किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता।

उन्होंने कहा कि शुगरकेन हार्वेस्टर का पूरा लाभ लेने के लिए गन्ने की बुवाई 4–5 फीट की दूरी पर कतारों में, एकल या दोहरी खाई विधि से की जानी चाहिए, ताकि मशीन से कटाई के लिए पर्याप्त क्षेत्र उपलब्ध हो सके और किसी प्रकार का नुकसान न हो।

इस अवसर पर डॉ. गुलज़ार सिंह संघेड़ा ने बताया कि चौड़ी दूरी विधि से गन्ने की बुवाई करने पर अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि चौड़ी दूरी वाली कतारों (120–150 सेंटीमीटर) में बोई गई गन्ने की फसल में निराई-गुड़ाई और मिट्टी चढ़ाने का कार्य आसान हो जाता है, जिससे खेती की लागत कम होती है और मजदूरों पर निर्भरता घटती है।

उन्होंने आगे बताया कि चौड़ी दूरी पर बुवाई करने से गन्ने की फसल को अधिक मात्रा में सूर्य का प्रकाश और हवा मिलती है, जिससे गन्ने का वजन और लंबाई बढ़ती है, जो गन्ने और चीनी के उत्पादन को बढ़ाने में सहायक होती है। इसके अलावा चौड़ी दूरी विधि से बोई गई गन्ने की फसल पर कीटों और बीमारियों का प्रकोप भी कम होता है और यदि कोई समस्या आती है तो कीटनाशक, फफूंदनाशक और खाद का छिड़काव करना आसान हो जाता है।

उन्होंने कहा कि बसंत ऋतु की गन्ने की फसल की दो कतारों के बीच की खाली जगह का उपयोग अल्प अवधि की फसलों (जैसे ग्रीष्मकालीन मूंग, माह, भिंडी, चारे के लिए मक्का या मेंथा) की खेती के लिए किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि दलहनी फसलों की खेती से मिट्टी में नाइट्रोजन की पूर्ति होती है, जिससे यूरिया खाद के उपयोग में कमी आती है।

इस मौके पर उपस्थित प्रगतिशील किसान आलमदीप सिंह ने पंजाब सरकार से मांग की कि जिस तरह धान की बुवाई करने वाले किसानों को 1500 रुपये प्रति एकड़ दिए जाते हैं, उसी तरह चौड़ी दूरी विधि से गन्ने की खेती करने वाले किसानों को भी प्रोत्साहन राशि दी जाए, ताकि गन्ने के रकबे को बढ़ाने के लिए किसान प्रोत्साहित हो सकें।

इस अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. राजेश गोयल (प्रिंसिपल साइंटिस्ट), डॉ. राजिंदर कुमार (कीट प्रबंधन विशेषज्ञ), वाइस प्रेसिडेंट सुधीर बालियान और गन्ना इंस्पेक्टर मोहन सिंह उपस्थित थे।

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