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भारत की आयात निर्भरता कम करने के लिए पंजाब ने पोटाश के खोज कार्यों में तेज़ी लाई

चंडीगढ़, 17 जनवरी:
पंजाब में भूमिगत पोटाश की खोज से जुड़े कार्यों में तेजी लाने और भारत की पोटाश आयात पर भारी निर्भरता को कम करने के उद्देश्य से पंजाब सरकार ने कृषि के लिए उपयोगी घरेलू खनिज संसाधनों को सशक्त बनाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

इस क्रम में पंजाब के खनन एवं भू-विज्ञान मंत्री श्री बरिंदर कुमार गोयल की अध्यक्षता में पंजाब सिविल सचिवालय में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पंजाब में पोटाश भंडार वाले प्रमुख संभावित क्षेत्रों में खोज के लिए समय-सीमाएं निर्धारित करने के साथ-साथ इस संबंध में चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई और भविष्य की प्राथमिकताएं तय की गईं। बैठक में भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के उप महानिदेशक (पंजाब, हिमाचल और हरियाणा) श्रीमती गुप्ता, निदेशक श्रीमती सुष्री मिश्रा और श्रीमती अपराजिता भट्टाचार्जी तथा खनन एवं भू-विज्ञान विभाग, पंजाब से मुख्य अभियंता सरदार हरदीप सिंह मैंदीरत्ता और सहायक भू-वैज्ञानिक श्री पारस महाजन शामिल हुए।

बैठक में फील्ड सीजन 2025-26 के दौरान पूर्ण हुए खोज ब्लॉकों की स्थिति और चल रही ड्रिलिंग गतिविधियों की समीक्षा के साथ-साथ फील्ड सीजन 2026-27 के लिए प्रस्तावित खोज और प्रारंभिक अन्वेषण कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। विशेष रूप से पोटाश की बड़ी संभावनाओं वाले फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब जिलों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां पोटाश के बड़े भंडार की पहचान की गई है।

मंत्री को जानकारी देते हुए जीएसआई के प्रतिनिधियों ने बताया कि कबरवाला ब्लॉक और शेरगढ़–दलमीरखेड़ा ब्लॉक में जी-4 चरण की खोज पूरी हो चुकी है और संबंधित भू-वैज्ञानिक मेमोरेंडम राज्य सरकार को सौंप दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य की सहमति के बाद शेरगढ़–शेरावाला–रामसरा–दलमीरखेड़ा का संयुक्त ब्लॉक खनन मंत्रालय द्वारा छठे चरण में कंपोजिट लाइसेंस की नीलामी के लिए रखा गया है, जिसके परिणामों की प्रतीक्षा है। इसके अलावा, राजपुरा–राजावाली ब्लॉक और गिद्दड़ांवाली–अजीमगढ़ ब्लॉक में छह स्थानों पर ड्रिलिंग चल रही है, जिनमें से पांच स्थानों पर कार्य पूरा हो चुका है और रासायनिक विश्लेषण के बाद अंतिम रिपोर्टें अप्रैल तक आने की उम्मीद है।

आगामी फील्ड सीजन 2026-27 के लिए जीएसआई ने फाजिल्का जिले के केरा–खेड़ा ब्लॉक और सईयदवाला ब्लॉक में प्रस्तावित खोज सर्वेक्षण तथा कंधवाला–रामसरा ब्लॉक में प्रारंभिक अन्वेषण का प्रस्ताव रखा है, जिसमें 15 ड्रिलिंग साइटें शामिल हैं।

पूरे बेसिन को कवर करने के संबंध में जीएसआई अधिकारियों ने बताया कि पंजाब के पूरे खनिज भंडार का भू-भौतिकीय तरीकों से सर्वेक्षण किया जा रहा है और विस्तृत खोज के लिए लगभग 50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की पहले ही पहचान की जा चुकी है। इस संबंध में मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड द्वारा मंत्रालय को परियोजना प्रस्तुत की जाएगी।

इन निरंतर और वैज्ञानिक प्रयासों की सराहना करते हुए श्री बरिंदर कुमार गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फील्ड सीजन 2025-26 के दौरान चल रहे ड्रिलिंग और मैपिंग कार्यों में तेजी लाई जाए और वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित ब्लॉकों को समय पर पूरा किया जाए। उन्होंने खनन एवं भू-विज्ञान विभाग, पंजाब और जीएसआई के बीच मासिक समीक्षा बैठकों के आयोजन के भी निर्देश दिए, ताकि भविष्य की खनन संभावनाओं से जुड़े अध्ययनों की योजना बनाने के साथ-साथ अन्य ब्लॉकों की कड़ी निगरानी और समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा सके।

कैबिनेट मंत्री ने व्यापक जनहित का उल्लेख करते हुए कहा, “पोटाश कृषि के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज है और भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 99 प्रतिशत पोटाश आयात करता है। पंजाब में पोटाश की खोज और भविष्य में इसके उत्पादन में सफलता का सीधा लाभ हमारे किसानों को मिलेगा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और राज्य व देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।”

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार वैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे हर प्रयास का पूर्ण समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि देश को इस महत्वपूर्ण खनिज में आत्मनिर्भरता की ओर ले जाया जा सके।

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