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नामधारी संप्रदाय की वीरता और त्याग को दुनिया हमेशा याद रखेगी – कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां

मालेरकोटला ,17 जनवरी –

नामधारी संप्रदाय द्वारा देश की आज़ादी, धर्म और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए दी गई कुर्बानियां भारतीय इतिहास में सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेंगी। यह विचार पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने मालेरकोटला स्थित नामधारी शहीदी स्मारक में 66 नामधारी शहीद सिंहों की स्मृति में आयोजित राज्य स्तरीय शहीदी समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

कैबिनेट मंत्री मुंडियां ने कहा कि नामधारी संप्रदाय सादगी, सत्य, विनम्रता और त्याग की जीवंत मिसाल है। उन्होंने कहा कि सतगुरु राम सिंह जी द्वारा दिखाए गए अहिंसा, असहयोग और अवज्ञा के मार्ग ने देश की आज़ादी की लड़ाई को नई दिशा दी। इतिहास साक्षी है कि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जन-जागरण की चिंगारी इसी पवित्र भूमि मालेरकोटला से उठी थी।

उन्होंने कहा कि 66 नामधारी शहीद सिंहों की कुर्बानी केवल एक धार्मिक संप्रदाय की नहीं, बल्कि पूरे देश की स्वतंत्रता संग्राम की नींव है। आज की पीढ़ी के लिए ये बलिदान प्रेरणा का स्रोत हैं कि हम सत्य, ईमानदारी और देश सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ें।

उन्होंने बताया कि इस समारोह में शामिल होने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को भी आना था, लेकिन कुछ अपरिहार्य कारणों से वे उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार को जो भी आदेश या सेवा सौंपी जाएगी, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाया जाएगा। कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने संगत से अपील की कि वे गुरुओं और नामधारी संप्रदाय द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए अपने जीवन को उच्च आदर्शों से जोड़ें और पंजाब को फिर से “रंगला पंजाब” बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाएं।

समारोह के दौरान वर्तमान गद्दीनशीन नामधारी उदय सिंह जी भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अन्य वक्ताओं के अलावा हलका अमरगढ़ के विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा और नामधारी सुरिंदर सिंह ने भी संबोधित किया।

इस मौके पर विधायक डॉ. जमील उर रहमान, विधायक समराला जगतार सिंह दियालपुर, डिप्टी कमिश्नर विराज एस. तिड़के, जिला पुलिस प्रमुख गगन अजीत सिंह, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर नवरीत कौर सेखों, एस.पी. सतपाल शर्मा, एस.डी.एम. गुरमीत कुमार बांसल, नामधारी सुरिंदर सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रमुख हस्तियां और संगतें उपस्थित थीं।

समूह संगत द्वारा 66 नामधारी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया।

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