
चंडीगढ़, 19 जनवरी:
मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य से बाल भिक्षावृत्ति जैसी सामाजिक कुरीति को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सरकार द्वारा बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ सख्त और परिणामोन्मुखी कार्रवाई की जा रही है। यह बयान सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने दिया।
इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि राज्य भर में चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान बीते दो दिनों में सभी जिलों के हॉटस्पॉट्स पर की गई छापेमारी में कुल 31 भीख मांगने वाले बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इनमें से 4 बच्चों को दस्तावेज़ी सत्यापन के बाद बाल कल्याण समिति द्वारा मौके पर ही माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया, जबकि 27 बच्चों को अस्थायी रूप से बाल गृहों में भेजा गया है, जहां सत्यापन के उपरांत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि प्रोजेक्ट जीवनज्योत 2.0 के तहत अब तक कुल 1023 बच्चों को बाल भिक्षावृत्ति से बचाया जा चुका है। इनमें से 38 बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ दिया गया, 349 बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया गया, 9 बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों से जोड़ा गया, जबकि 13 बच्चों को आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की गई हैं। बाल गृहों में रह रहे बच्चों को शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सुविधाएं और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, ताकि उन्हें एक सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य की ओर अग्रसर किया जा सके।
इस अभियान के सकारात्मक परिणामस्वरूप राज्य में बाल भिक्षावृत्ति की प्रवृत्ति में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। पंजाब सरकार ने बाल भिक्षावृत्ति के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई हुई है और इन कार्रवाइयों को और तेज़ किया जाएगा।
डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि बच्चों को दान देने से परहेज़ करें और यदि कोई बच्चा सड़कों पर भीख मांगता दिखाई दे, तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, अपने जिले की बाल कल्याण समिति या संबंधित अधिकारियों को सूचित करें, ताकि हर बच्चे के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।









