
चंडीगढ़, 10 फरवरी 2026
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने सोमवार को कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं पर तीखा हमला करते हुए उन पर दशकों से गुप्त सत्ता-साझेदारी का गठजोड़ चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये नेता राजनीतिक विरोधी होने का दिखावा करते हुए पंजाब को लूटते रहे।
पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पन्नू ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की एक वीडियो क्लिप चलाई, जिसमें बिट्टू स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि वर्ष 2017 में उन्होंने भगवंत मान को हराने और सुखबीर बादल की जीत सुनिश्चित करने की योजना बनाई थी। पन्नू ने कहा कि यह कांग्रेस और अकाली नेतृत्व के बीच नापाक गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब करता है।
पन्नू ने कहा, “यह ‘आप’ का आरोप नहीं है, यह उनका अपना नेता बोल रहा है। रवनीत बिट्टू ने खुलेआम स्वीकार किया है कि कांग्रेस और अकाली दल के नेता बंद कमरों में मिलकर काम करते थे और यह तय करते थे कि कौन जीतेगा, कौन हारेगा और कौन-सी सीट किसे मिलेगी।”
पांच साल एक ने लूटा, फिर अगले पांच साल दूसरे ने — ‘आप’ से पहले यही थी पंजाब की राजनीति
पन्नू ने आरोप लगाया कि वर्षों तक पंजाब ‘फिक्स मैच’ मॉडल पर चला—“पांच साल तुम राज करो, पांच साल हम। तुम हमसे सवाल मत पूछो, हम तुमसे नहीं पूछेंगे।” उन्होंने कहा कि दोनों दल एक-दूसरे को बचाते रहे। “यह शासन नहीं था, यह संगठित राजनीतिक भ्रष्टाचार था,” उन्होंने कहा।
पन्नू ने विस्तार से बताया कि किस तरह कांग्रेस और अकाली नेताओं के बीच विधानसभा क्षेत्रों को पहले से तय कर लिया जाता था—पटियाला एक के लिए, लांबी दूसरे के लिए, लहरागागा, सुनाम, बठिंडा, संगरूर, दोआबा, माझा—हर क्षेत्र में अकाली और कांग्रेसी नेताओं के बीच अंदरूनी सौदेबाजी चलती थी।
उन्होंने आगे कहा कि नेता बठिंडा में कुछ और कहते थे, संगरूर में कुछ और, और चंडीगढ़ पहुंचते-पहुंचते अपना बयान फिर बदल लेते थे। उन्हें यह भी याद नहीं रहता था कि उन्होंने कहां क्या कहा है।
पन्नू ने कहा कि जब संगरूर के एक गांव का एक आम आदमी राजनीति में आया और उनके गठजोड़ का पर्दाफाश करना शुरू किया, तो पूरा सिस्टम घबरा गया। उन्होंने 2017 में भगवंत मान को हराने की कोशिश की, 2019 में फिर कोशिश की, लेकिन संगरूर 2014 में ही सच्चाई समझ गया था। जब मान साहब संगरूर से दो बार जीते, तो यह संदेश पूरे पंजाब में गया और 2022 में जनता ने अपना फैसला सुना दिया।
पन्नू ने कहा कि 2022 में पंजाब ने पूरे पुराने सिस्टम को खारिज कर दिया। कैप्टन अमरिंदर सिंह हार गए, बिक्रम मजीठिया हार गए, प्रकाश सिंह बादल हार गए, सुखबीर बादल हार गए और नवजोत सिद्धू हार गए। उन्होंने कहा कि यह कोई इत्तफाक नहीं था, बल्कि भ्रष्ट व्यवस्था के ढहते हुए स्तंभ थे।
पन्नू ने कहा कि विपक्ष इसीलिए बौखलाया हुआ है क्योंकि पंजाब चार वर्षों में बदल गया है। 45 वर्षों बाद नहरों का पानी टेल तक पहुंचा है, सड़क सुरक्षा फोर्स (एसएसएफ) मिनटों में आपातकालीन सहायता सुनिश्चित करती है, 16 टोल प्लाजा बंद किए गए हैं, घरों को 600 यूनिट मुफ्त बिजली, 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर और बिना किसी डर या पक्षपात के पारदर्शी शासन मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष काम की बात नहीं करता, बल्कि सिर्फ यही कहता है कि “हमें आने दो, हम भगवंत मान को गिरफ्तार कर लेंगे।” पन्नू ने सवाल किया—किस बात के लिए गिरफ्तार करोगे? किसानों को पानी देने के लिए? हादसों के पीड़ितों को बचाने के लिए? या लूट रोकने के लिए?
पन्नू ने कहा कि ‘आप’ के रुख का सबसे बड़ा सबूत यह है कि पूर्व कांग्रेसी नेता स्वयं आज अपराध स्वीकार कर रहा है। रवनीत बिट्टू आज केंद्रीय मंत्री हैं। वे झूठ नहीं बोल रहे जब कहते हैं कि उन्हें भगवंत मान को हराने और सुखबीर बादल की मदद करने का संदेश देकर भेजा गया था। सवाल सिर्फ इतना है कि उन्हें भेजा किसने था?
अंत में पन्नू ने कहा कि पंजाब आज जानता है कि कौन मिलकर खेल खेलता रहा और कौन जनता के साथ खड़ा था। गुप्त सौदों का दौर खत्म हो चुका है। ईमानदार राजनीति का दौर शुरू हो गया है, और यही बात वे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।









