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एस.सी. आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस को प्रताप सिंह बाजवा के घरेलू कर्मचारियों ने लेने से किया इनकार: जसवीर सिंह गढ़

चंडीगढ़, 10 फरवरी:

 

पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग द्वारा भेजे गए नोटिस को विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के चंडीगढ़ स्थित सेक्टर-8 और सेक्टर-39 के निवास स्थानों पर मौजूद घरेलू कर्मचारियों ने लेने से इनकार कर दिया। यह जानकारी आज यहां पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन सरदार जसवीर सिंह गढ़ी ने दी।

 

उन्होंने बताया कि कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ई.टी.ओ. के खिलाफ की गई जाति-सूचक टिप्पणी के संबंध में एस.सी. आयोग द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) नोटिस की तामील करवाने के लिए आयोग का कर्मचारी दो बार विपक्ष के नेता के घर जा चुका है।

 

सरदार गढ़ी ने कहा कि प्रताप सिंह बाजवा को पहले तरनतारन चुनाव के दौरान नोटिस जारी किया गया था और अब 90 दिनों के भीतर एक अन्य मामले में फिर से नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रताप सिंह बाजवा ने अपने इस बयान के माध्यम से जहां अपनी जागीरदार मानसिकता को उजागर किया है, वहीं कांग्रेस पार्टी के दलित-विरोधी डीएनए का चेहरा भी सामने रखा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी अपने बयानों के जरिए दलित-विरोधी मानसिकता का प्रदर्शन कर चुके हैं और आयोग जल्द ही उनके खिलाफ भी कार्रवाई करने जा रहा है।

 

सरदार गढ़ी ने कहा कि हरभजन सिंह ई.टी.ओ. ने जीवन की कठिनाइयों के बावजूद एम.ए., बी.एड. करने के बाद बच्चों को शिक्षा देने का कार्य किया और फिर पंजाब की प्रतिष्ठित एवं सम्मानित पी.सी.एस. परीक्षा पास कर ई.टी.ओ. बने और सेवाएं निभाईं। इस पर दलित वर्ग और पूरे पंजाब को गर्व है।

 

आयोग के चेयरमैन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने दलितों को केवल अपमान ही दिया है, जिसके अनेक प्रमाण मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया का महान संविधान देने वाले बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का मार्ग रोकने के लिए कांग्रेस पार्टी ने अनेक प्रयास किए।

 

उन्होंने कहा कि बाबा साहेब को संविधान सभा में प्रवेश से रोकने के लिए कांग्रेस पार्टी ने कई कोशिशें कीं। इसके बाद जिस क्षेत्र से बाबा साहेब चुनाव जीतकर आए थे, उस क्षेत्र को 58 प्रतिशत गैर-मुस्लिम आबादी होने के बावजूद पाकिस्तान को दे दिया गया, जबकि विभाजन के समय नियम था कि जिस क्षेत्र की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी गैर-मुस्लिम होगी, वह भारत को दिया जाएगा। इसके अलावा दलितों को साइमन कमीशन द्वारा दिए जा रहे अधिकारों को समाप्त करवाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने हर हथकंडा अपनाया। अंततः साइमन कमीशन की सिफारिशों को लागू होने से रोकने के लिए महात्मा गांधी ने पुणे जेल में आमरण अनशन किया, जिसके कारण बाबा साहेब को दलितों को मिल रहे दोहरे मतदान अधिकार को छोड़ना पड़ा।

 

उन्होंने कहा कि आजकल कांग्रेस पार्टी के नेता यह प्रचार करते फिरते हैं कि दलितों को कांग्रेस पार्टी ने बहुत कुछ दिया है, जबकि सच्चाई यह है कि भारत के दलितों को अधिकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और भारतीय संविधान ने दिए हैं।

 

अंत में उन्होंने कहा कि यदि प्रताप सिंह बाजवा की भारतीय संविधान में आस्था है, तो वे एस.सी. आयोग द्वारा दिए गए इस नोटिस के संबंध में 11 फरवरी 2026 को दोपहर 3 बजे के बाद एस.सी. आयोग के कार्यालय में उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण दें।

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