
चंडीगढ़, 1 फरवरी:
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने एक बार फिर पंजाब और हरियाणा के किसानों की जायज़ चिंताओं को नजरअंदाज किया है, जिससे उसके किसान-हितैषी होने के खोखले दावों की पोल खुल गई है। चीमा ने कहा कि कृषि अवसंरचना फंड में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है और न ही मंडी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कोई ठोस सहायता दी गई है, जिससे कृषि-प्रधान राज्यों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
उन्होंने कहा कि पंजाब का किसान देश का पेट भरता है, फिर भी केंद्र सरकार लगातार उन प्रणालियों में निवेश की अनदेखी कर रही है जो खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। वित्त मंत्री ने उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए अपनाए गए चयनात्मक दृष्टिकोण की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जहां बजट में नारियल, काजू, चंदन और ड्राई फ्रूट्स जैसी फसलों का उल्लेख है, वहीं उत्तर भारत के किसानों के लिए कुछ भी नहीं है, जो अपनी कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप फसलों पर निर्भर हैं।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह बजट स्पष्ट रूप से केंद्र के पक्षपात और अन्न उत्पादक राज्यों, विशेष रूप से पंजाब के किसानों के प्रति उसकी लगातार उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि किसान सम्मान, सहयोग और उचित निवेश के हकदार हैं, न कि खोखले नारों के।
पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 में कृषि अवसंरचना फंड में बढ़ोतरी या मंडी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्यों को अपने विकास के लिए अपने ही संसाधनों पर निर्भर रहना होगा। बजट में उच्च मूल्य वाली फसलों के विकास का उल्लेख तो किया गया, लेकिन पंजाब को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि यूरिया सब्सिडी को पिछले वर्ष 1,26,475 करोड़ रुपये से घटाकर 1,16,805 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस बजट में ‘आम आदमी’ के लिए कुछ भी नहीं है। आज के समय में जब महंगाई आम आदमी की बचत को खत्म कर रही है और आय नहीं बढ़ रही, ऐसे में करों में शून्य राहत अनुचित है। वास्तव में, भारत सरकार ने एसटीटी (सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स) बढ़ा दिया है, जिसका सीधा नकारात्मक असर आम आदमी पर पड़ेगा। इस बढ़ोतरी के बाद दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर भी कोई राहत नहीं दी गई है। यह आम आदमी को हर तरफ से निचोड़ने जैसा है।
रक्षा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि केंद्रीय वित्त मंत्री भारत को रक्षा उत्पादन में मजबूत बनाने और पिछले वर्ष पाकिस्तान के साथ तनाव को देखते हुए रक्षा बजट में सार्थक बढ़ोतरी के लिए बड़ी योजनाओं की घोषणा करेंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। केंद्रीय वित्त मंत्री के भाषण में रक्षा का कुल उल्लेख केवल चार बार किया गया।
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसे पिछले वर्ष बहुत धूमधाम से शुरू किया गया था ताकि पारंपरिक कारीगरों और दस्तकारों को व्यापक और आधुनिक सहायता तथा कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके, लेकिन इसका बजट 5,100 करोड़ रुपये से घटाकर 3,861 करोड़ रुपये कर दिया गया है। एक तरफ सरकार इसे विरासत उद्योगों और युवा-शक्ति बजट का हिस्सा बताती है, तो दूसरी ओर इसी योजना के बजट में कटौती कर दी गई।
16वें वित्त आयोग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वर्टिकल डिवोल्यूशन (कर पूल में सभी राज्यों का कुल हिस्सा) 41 प्रतिशत पर ही रखा गया है, इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। वित्त आयोग ने राज्यों की खराब वित्तीय स्थिति की पूरी तरह अनदेखी की है और वित्तीय दबाव के बावजूद राज्यों का हिस्सा बढ़ाने में विफल रहा है। 15वें वित्त आयोग में पंजाब का क्षैतिज वितरण 1.807 प्रतिशत से बढ़कर 1.996 प्रतिशत हुआ था, लेकिन 16वें वित्त आयोग से कोई राजस्व घाटा अनुदान नहीं मिला, जबकि 15वें वित्त आयोग ने इसकी सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ की शर्तें अत्यधिक सीमित हैं, जो पंजाब जैसे राज्यों में आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन में बाधा बनेंगी। बजट भाषण में राज्य का कहीं भी उल्लेख नहीं है, जिससे स्पष्ट है कि पंजाब और पंजाबियों को पूरी तरह भुला दिया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने इसे अत्यंत निराशाजनक बताया और कहा कि शिक्षा बजट में पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत से भी कम (लगभग 8 प्रतिशत) की बढ़ोतरी की गई है। पीएम-श्री योजना के लिए भी पिछले वर्ष की तरह ही 7,500 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
पूंजी निर्माण के लिए राज्यों को विशेष सहायता (SASCI) के बारे में उन्होंने कहा कि इस योजना का बजट में कोई उल्लेख नहीं है, जबकि सभी राज्यों ने पूंजीगत व्यय को बनाए रखने के लिए इसके विस्तार की मांग की थी।
स्वास्थ्य के मामले में उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना का बजट 9,500 करोड़ रुपये पर यथावत रखा गया है। स्वच्छ भारत मिशन का बजट पिछले वर्ष के 5,000 करोड़ रुपये से घटाकर 2,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। मनरेगा के तहत बजट 88,000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 95,692 करोड़ रुपये किया गया है।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि सीमा अवसंरचना और प्रबंधन योजना (केंद्रीय योजना) का बजट भी पिछले वर्ष के 5,597 करोड़ रुपये से घटाकर 5,577 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि इस बजट में दक्षिण और उत्तर-पूर्वी भारत पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। बजट में न तो पंजाब और न ही पूरे उत्तर भारत के लिए कुछ है। किसानों और कृषि के लिए भी इस बजट में कुछ नहीं है। इस केंद्रीय बजट में नौकरियों और युवाओं को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।









