
चंडीगढ़, 8 फरवरी 2026
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक खतरनाक, किसान-विरोधी और देश-विरोधी समझौता करार दिया है। पार्टी ने कहा कि यह समझौता भारतीय कृषि को तबाह कर देगा और करोड़ों किसानों को आर्थिक बर्बादी की ओर धकेल देगा।
‘आप’ पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि भाजपा नेता सुनील जाखड़ भारत के गरीब और सीमांत किसानों पर पड़ने वाले इसके घातक प्रभावों को समझे बिना, या जानबूझकर छिपाकर, इस सौदे का जश्न मना रहे हैं।
धालीवाल ने कहा कि सुनील जाखड़ का यह कहना कि ‘आप’ चुप है, पूरी तरह गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस दिन से इस सौदे की घोषणा हुई है, पार्टी पिछले दस दिनों से इसका विरोध कर रही है। असल में भाजपा ने देश को अंधेरे में रखा है। प्रधानमंत्री संसद में इस मुद्दे पर बोल नहीं सके और देश को इस सौदे की जानकारी डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट्स के जरिए मिली।
उन्होंने कहा कि ट्रंप ने अपने बयानों में बार-बार ‘एग्रीकल्चर’ शब्द का इस्तेमाल किया है, जो हर भारतीय किसान के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। इस सौदे के जरिए भारतीय बाजारों को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोला जा रहा है, जो सीधे तौर पर हमारे किसानों के लिए खतरा है।
अमेरिकी लाल ज्वार, मक्का, कपास, सेब और बादाम का हवाला देते हुए धालीवाल ने पूछा कि भारतीय किसानों की रक्षा कौन करेगा?
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में पैदा होने वाली 75 प्रतिशत लाल ज्वार भारतीय बाजारों में आती है, तो महाराष्ट्र जैसे सूखा-प्रभावित क्षेत्रों के गरीब किसान, जिन्हें पहले ही कोई एमएसपी सहायता नहीं मिलती, पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।
धालीवाल ने कहा कि यदि अमेरिकी लाल ज्वार और अन्य अमेरिकी अनाज व डेयरी उत्पाद भारतीय बाजारों में भर जाते हैं, तो हमारी मक्का, बाजरा और देसी फसलें तबाह हो जाएंगी। पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और यूपी के किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे।
उन्होंने आगे सवाल उठाया कि अगर सब्सिडी वाला अमेरिकी कपास भारत में प्रवेश करता है तो कपास किसानों का क्या होगा? यदि अमेरिकी बादाम और अखरोट बाजार में भर गए तो जम्मू-कश्मीर के किसान कहां जाएंगे? हिमाचल और कश्मीर के सेब उत्पादक सस्ते अमेरिकी सेबों से कैसे मुकाबला करेंगे? डेयरी और अन्य कृषि उत्पादों का क्या होगा जो इसके बाद आएंगे?
धालीवाल ने भारत के हितों को पूरी तरह गिरवी रखने के लिए भाजपा सरकार की निंदा की। उन्होंने कहा कि पहले भारतीय वस्तुओं पर 2.8 प्रतिशत टैरिफ था, ट्रंप के कार्यकाल में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया, और अब भारतीय निर्यात को 18 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ 60 प्रतिशत से घटाकर लगभग शून्य कर दिया है। यह कोई व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मसमर्पण है।
सुनील जाखड़ पर तीखा हमला करते हुए धालीवाल ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तब जाखड़ इंदिरा गांधी के गुण गाते थे, आज वे नरेंद्र मोदी के गुण गा रहे हैं। लेकिन वे कभी किसानों या पंजाबियों के लिए नहीं बोलते। किसानों के लिए बोलिए, अपने राजनीतिक आकाओं के लिए नहीं।
धालीवाल ने दोहराया कि यह समझौता भारतीय किसानों के खिलाफ है, राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है, भारतीय कृषि को तबाह कर देगा और किसानों को दिवालियापन व आत्महत्याओं की ओर धकेल देगा।
उन्होंने सवाल किया कि अमेरिका ने अपने अतिरिक्त कृषि उत्पादन के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार ढूंढ लिया है, लेकिन हमारे किसान कहां जाएंगे? इसका जवाब कौन देगा? उन्होंने सुनील जाखड़ और भाजपा सरकार को सीधी चुनौती दी कि वे देश के लोगों को समझाएं कि यह समझौता भारतीय किसानों के हित में कैसे है। एक सवाल का जवाब देकर शुरुआत करें—जब अमेरिकी लाल ज्वार, मक्का, कपास, सेब और बादाम हमारे बाजारों में भर जाएंगे, तो भारतीय किसानों को क्या फायदा होगा?
धालीवाल ने भाजपा पंजाब के नेताओं को चेतावनी दी कि वे बोलने से पहले सोचें और देश को गुमराह करना बंद करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि आम आदमी पार्टी इस “किसान-विरोधी साजिश” को हर स्तर पर बेनकाब करती रहेगी।









