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गेहूं को अधिक गर्मी से बचाने और बेहतर पैदावार के संबंध में गाँव सकरौदी में किसान गोष्ठी आयोजित

भवानीगढ़, 9 फरवरी (000):

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के निदेशक विस्तार शिक्षा के योग्य मार्गदर्शन में फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर द्वारा गाँव सकरौदी में गेहूं की फसल को अधिक गर्मी से बचाने, कीट-रोगों की समग्र रोकथाम तथा भूमि स्वास्थ्य सुधार से संबंधित विषयों पर किसान गोष्ठी आयोजित की गई। केंद्र के प्रभारी एवं वरिष्ठ विस्तार वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार गर्ग ने किसानों को आने वाले समय में बढ़ते तापमान से बचाव के लिए गेहूं की फसल पर पोटैशियम नाइट्रेट के छिड़काव के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

 

उन्होंने बताया कि आवश्यक तापमान से अधिक गर्मी गेहूं की फसल के लिए हानिकारक हो सकती है, जिसे गर्मी का तनाव या हीट स्ट्रेस कहा जाता है। अधिक गर्मी के कारण दाने भरने की अवस्था में गेहूं समय से पहले पक जाती है, दाने सिकुड़ जाते हैं और सूखे के कारण दानों का वजन कम हो जाता है। इस तनाव पर नियंत्रण पाने में पोटाश तत्व का महत्वपूर्ण योगदान है। पीएयू लुधियाना द्वारा गेहूं की फसल को अंतिम गर्मी के तनाव से बचाने तथा अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए दाने भरने की अवस्था में 2 प्रतिशत पोटैशियम नाइट्रेट (4 किलो 13:0:45 को 200 लीटर पानी में) के दो छिड़काव—पहला ध्वज पत्ती निकलने पर और दूसरा फूल आने के समय—करने की सिफारिश की गई है। इन छिड़कावों से दानों का वजन और प्रति बाल दानों की संख्या बढ़ती है, जिससे गेहूं की पैदावार में वृद्धि होती है।

 

भूमि स्वास्थ्य सुधार के लिए डॉ. अशोक ने किसानों को गेहूं की कटाई के बाद हरी खाद की फसलें जैसे सन, ढैंचा/जंतर आदि बोने की सलाह दी। उन्होंने मिट्टी परीक्षण करवाकर भूमि में जैविक पदार्थ बढ़ाने के लिए फसल अवशेषों को खेत में ही संभालने तथा जैविक खादों के उपयोग पर भी विचार साझा किए। उन्होंने केंद्र द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं—जैसे किसान मेलों के बाद खरीफ फसलों के बीजों की बिक्री, कृषि साहित्य की बिक्री, सब्जियों के बीज किट, जैविक खादों के टीके आदि—के बारे में किसानों को जानकारी दी। किसानों द्वारा पूछे गए प्रश्नों जैसे नैनो यूरिया के उपयोग के फायदे-नुकसान, बोरॉन तत्व की आवश्यकता, मिट्टी परीक्षण के लिए नमूने लेने की विधि आदि के संतोषजनक उत्तर दिए गए।

 

गोष्ठी के बाद सरदार बेअंत सिंह एवं अन्य किसानों के गेहूं तथा मनजिंदर सिंह के प्याज के खेतों का दौरा भी किया गया और मौके पर ही किसानों की खेती से संबंधित समस्याओं के समाधान बताए गए।

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