
श्री मुक्तसर साहिब, 23 मार्च:
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा लुधियाना में 20-21 मार्च 2026 को ‘खेती विविधता अपनाओ, बहुमूल्य वातावरण बचाओ’ थीम के तहत आयोजित मुख्य किसान मेले के दौरान विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र, श्री मुक्तसर साहिब की टीम और क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महत्वपूर्ण सम्मान प्राप्त किए। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, श्री मुक्तसर साहिब को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अन्य कृषि विज्ञान केंद्रों में किसानों तक कृषि संबंधी जानकारी अधिकतम पहुंचाने के लिए पहला स्थान प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि किसानों में नई कृषि तकनीकों और आधुनिक जानकारी के प्रसार हेतु केंद्र के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।
इसके साथ ही जिले के प्रगतिशील किसानों ने भी विभिन्न फसलों में उत्कृष्ट गुणवत्ता के उत्पाद प्रस्तुत कर पुरस्कार हासिल किए। गांव बोदीवाला खड़क सिंह के किसान कुलदीप सिंह को मिर्च और फूलगोभी की फसल के लिए पहला पुरस्कार मिला। इसी प्रकार गांव खुन्नण कलां के किसान गुरपाल सिंह को हल्दी की फसल के लिए दूसरा पुरस्कार प्राप्त हुआ, जबकि गांव बोदीवाला खड़क सिंह के ही किसान मनदीप सिंह को चने की फसल के लिए दूसरा स्थान मिला। ये सभी पुरस्कार पंजाब भर के किसानों के बीच आयोजित प्रतिस्पर्धा में फसलों की उच्च गुणवत्ता के आधार पर प्रदान किए गए। यह उपलब्धियां दर्शाती हैं कि जिला श्री मुक्तसर साहिब के किसान नई कृषि तकनीकों को अपनाते हुए गुणवत्तापूर्ण उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं।
डॉ. अमरजीत सिंह खैहरा ओपन एयर थिएटर में आयोजित इस विशेष समारोह की अध्यक्षता पी.ए.यू. के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में आई.सी.ए.आर. के महानिदेशक (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा) डॉ. मंगीलाल जाट उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. गुरदेव सिंह खुश, पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन श्री हरचंद सिंह बरस्ट, अनुसंधान निदेशक डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट, प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. मख्खन सिंह भुल्लर, अटारी के निदेशक डॉ. परविंदर शेरों, सिफ्ट के निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालिवाले, भारतीय मक्का अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. एच.एस. जाट, पी.ए.यू. के रजिस्ट्रार डॉ. ऋषिपाल सिंह (आईएएस) तथा प्रबंधन बोर्ड के सदस्य डॉ. अशोक कुमार, डॉ. दविंदर सिंह चीमा, श्री अमरजीत सिंह ढिल्लों और श्री मोहन सिंह जाखड़ भी उपस्थित थे।









