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वित्त विधेयक 2026 पर मालविंदर कंग की टिप्पणियां: कई खोखले दावे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है।

नई दिल्ली/चंडीगढ़, 24 मार्च 2026 :

आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद Malvinder Singh Kang ने वित्त विधेयक 2026 पर बोलते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक के दौरान आर्थिक मजबूती और सुधारों के सरकार के दावे जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटे हुए हैं।

कंग ने कहा कि जहां वित्त मंत्री ने आर्थिक प्रगति के बड़े-बड़े दावे किए हैं, वहीं देश की अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यदि हम पिछले दस वर्षों पर नजर डालें तो महंगाई देश के इतिहास के सबसे ऊंचे स्तर पर है और भारतीय रुपया काफी कमजोर हो गया है, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90 के खतरनाक आंकड़े को पार कर गया है। जो लोग कभी 60 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल देने का वादा करते थे, आज उन्होंने कीमतें 100 रुपये से ऊपर पहुंचा दी हैं और डीजल भी लगातार महंगा होता जा रहा है।

किसानों की दुर्दशा का जिक्र करते हुए कंग ने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने का वादा पूरी तरह विफल साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में आय दोगुनी होने के बजाय लागत खर्च दोगुने या तीन गुना हो गए हैं। कीटनाशकों से लेकर उर्वरकों तक हर चीज महंगी हो गई है, जिससे किसान और अधिक संकट में फंस गए हैं।

उन्होंने वैश्विक आर्थिक दावों और व्यक्तिगत समृद्धि के बीच बड़े अंतर की ओर इशारा करते हुए कहा कि हमें बताया जा रहा है कि भारत दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन प्रति व्यक्ति आय की रैंकिंग गिरकर 142वें स्थान पर पहुंच गई है। गरीबी बढ़ रही है और अमीर-गरीब के बीच की खाई और गहरी होती जा रही है।

कॉरपोरेट समर्थक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कंग ने आरोप लगाया कि बड़े कॉरपोरेट घरानों के 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज एनपीए के रूप में माफ कर दिए गए हैं, जबकि किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी के लिए अब भी संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि यह साफ दर्शाता है कि सरकार किसके साथ खड़ी है।

कंग ने अग्निवीर योजना की भी कड़ी आलोचना करते हुए इसे देश के युवाओं पर बड़ा आघात बताया। उन्होंने कहा कि जो युवा कभी सशस्त्र बलों में देश की सेवा करने का सपना देखते थे, आज वे अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता में हैं। इस नीति ने कई युवाओं को निराशा और गलत रास्तों की ओर धकेल दिया है। उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा जैसे राज्यों में चिंताजनक रुझान देखने को मिल रहे हैं, जहां बेरोजगार युवा भटक रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मुद्दे पर कंग ने भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और इसके भारतीय किसानों पर संभावित प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने चेतावनी दी कि यह समझौता हमारे किसानों, विशेष रूप से डेयरी, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों तथा मक्का उत्पादकों की आजीविका पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। सरकार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के बजाय किसानों को असमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा में धकेल रही है।

उन्होंने पंजाब के माध्यम से सीमा पार व्यापार का मुद्दा भी उठाया। कंग ने कहा कि जहां मुंबई-कराची मार्गों के जरिए बड़े कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाने वाला व्यापार जारी है, वहीं अमृतसर-लाहौर (वाघा बॉर्डर) व्यापार मार्ग बंद पड़ा है। यदि इसे खोला जाए तो यह पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के किसानों की आर्थिक स्थिति बदल सकता है। उन्होंने कहा कि इस मार्ग के बंद रहने का कारण स्पष्ट है, क्योंकि इससे आम किसानों को ताकत मिलेगी, न कि बड़े कॉरपोरेट घरानों को।

सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कंग ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने के लिए कोई ठोस कदम न उठाने की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोई व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी कल्याणकारी योजनाओं को कमजोर करने से ग्रामीण आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। कंग ने कहा कि मनरेगा लाखों मजदूरों के लिए जीवनरेखा थी, लेकिन इसकी अहमियत घटाने से गरीब वर्गों से बुनियादी आय सुरक्षा छिन गई है।

अपने भाषण के अंत में कंग ने कहा कि मनरेगा को खत्म करना मजदूरों पर हमला है, अग्निवीर योजना युवाओं और रोजगार पर हमला है, और भारत-अमेरिका जैसे व्यापारिक समझौते किसानों की आजीविका पर हमला हैं। देश केवल मीडिया की खबरों और खोखले दावों के सहारे आगे नहीं बढ़ सकता। वास्तविक विकास तभी होगा जब देश का पेट भरने वाला किसान, सीमाओं की रक्षा करने वाला युवा और अर्थव्यवस्था को खड़ा करने वाला मजदूर सुरक्षित और सशक्त होगा।

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